पुराणसंग्रह!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसंग्रह – Puranasamgraha. Name of books pertaining to the life history of Jaina-Lords. आचार्य दामनन्दि, श्रीचन्द्र आदि आचार्यों द्वारा २४ तीर्थंकरों के जीवन चरित्र के आधार पर रचित इस नाम के कई ग्रंथ हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसंग्रह – Puranasamgraha. Name of books pertaining to the life history of Jaina-Lords. आचार्य दामनन्दि, श्रीचन्द्र आदि आचार्यों द्वारा २४ तीर्थंकरों के जीवन चरित्र के आधार पर रचित इस नाम के कई ग्रंथ हैं “
द्रव्य मोक्ष Installation of supreme soul of Siddhashila. मोह का एक भेद जीव के द्रव्यादि सम्बन्धि मूढ़भाव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञाभाव छेदना – Pragyaabhaava Chhedanaa. Sagacious knowledge related to 6 entries (dravyas). मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान और केवलज्ञान के द्वारा छह द्रव्यों का ज्ञान होना “
द्रव्य परिवर्तन Modification of material forms. द्रव्य की पर्याय का बदलना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्यगुण Common & specific virtues of substance or matter. द्रव्य के गुण दो तरह के हैं सामान्य गुण जो छहों द्रव्यों में पाये जाते हैं विशेषगुण जो हर एक ही में पाये जाते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य – अंतर Dissimilarity in form of matters. अंतर का एक भेद किसी समर्थ द्रव्य की किसी निमित्त से अमुक पर्याय का अभाव होने पर निमित्तान्तर से जब तक वह पर्याय पुनः प्रकट नहीं होती।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मोह-विजय : == णिस्सेसखीणमोहा, फलिहामलभायणुदयसमचित्तो। —पंचसंग्रह : १-१५ जिसने सम्पूर्ण मोह को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, उस निर्मोही का चित्त स्फटिक मणि के पात्र में रखे हुए स्वच्छ जल की भाँति निर्मल हो जाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदकल्पना – सापेक्ष – अशुद्ध – द्रव्यार्थिक नय –A kind of viewpoint which differentiate the relation of properties (virtues) and its possessor (matter). नय; जो द्रव्य में गुण-गुणी का भेदकर के उनमेंसम्बधं स्थापित करता है, जैसे द्रव्य गुण व पर्याय वाला है अथवा जीव ज्ञानवान्है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भूषांग:See – Bhusanamga jati kalpvraksh. देखें – भूषणांग जाति कल्प वृक्ष।