परशुराम!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परशुराम:Son of Jamdagni Tapas.जमदग्नि तापस का पूत्र, जिसने एक क्षत्रिय के द्वारा अपने पिता के वध का बदला लेने के लिए 21 बार पृथ्वी को क्षत्रियविहीन किया था । अंत में यह सुभौम चक्रवर्ती के चक्र से मारा गया ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परशुराम:Son of Jamdagni Tapas.जमदग्नि तापस का पूत्र, जिसने एक क्षत्रिय के द्वारा अपने पिता के वध का बदला लेने के लिए 21 बार पृथ्वी को क्षत्रियविहीन किया था । अंत में यह सुभौम चक्रवर्ती के चक्र से मारा गया ।
चतुरिन्द्रिय Four – sensed beings. स्पर्शन , रसना , घ्राण , चक्षु ये ४ इन्द्रियाँ जिन जीवों के होती हैं वे चतुरिन्द्रिय जीव हैं . जैसे -मक्खी , मच्छर आदि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परवाद:Dispute, Reproach] Synonym word for shrutgyan (Scriptural knowledge),विवाद, अपवाद, दूसरे की निंदा, श्रुतज्ञान का एक पर्यावाची नाम ।
थोस्सामिदंडक A lesson for the prayer of Jaina Lord . थोस्सामिहं जिणवरे-इत्यादिरूप एक चौबीस तीर्थंकर स्तुति का प्राकृत पाठ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवभक्ति Devotion towards Lord Jinendra. जिनेन्द्र देव के गुणों में विशेष अनुराग ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रैलोक्यजिनालयव्रत A type of vow (fasting) to be observed for different 48 days in regard to different temples of Teenlok (three worlds). तीन लोक में अकृत्रिम – शाश्र्वत जिन मंदिर 856, 97, 481 है। अधोलोक के भवनवासी देवों के 10 भेदों के मंदिरों की अपेक्षा 10, मध्यलोक के पंचमेरू आदि के 12, वयतरों के 8,…
त्रिषष्टि कर्म प्रकृति Sixty three types of Karmic nature (which are destroyed by Lord Arihant). 63 कर्म प्रकृतियां ,जिनके नाश से अरहंत परमेष्ठी होते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिक्कुमारी Eight particular female deities who come to serve the mother of Tirthankars (Jaina-Lords). श्री, ह्री, घृति, कीर्ति , बुद्धि, लक्ष्मी, शांति और पुष्टी से आठ दिक्कुमारी देवियाँ हैं जो तीर्थंकर माता की सेवा करने के लिए आती है (प्रतिष्ठा तिलक के आधार से)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिवर्णाचार A book written by Somdeva Bhattarak. सोमदेव भाट्ठारक (ई. 1610) कृत पूजा- अभिषेक, सूतक- पातक आदि विषयक ग्रंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चतुर्दश पूर्वित्व A type of supernatural power possessed by great saints (Shrut Kevalis). एक प्रकार की ऋद्धि. द्वादशांग श्रुतज्ञान को धारण करने वाले महर्षि अर्थात् श्रुतकेवली इस ऋद्धि के धारी होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]