देवकीर्ति!
देवकीर्ति An Acharya; disciple of Anantveerya. आचार्य ई. 990-1040 में अनंतवीर्य के शिष्य व गुणकीर्ति के सहधर्मा थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवकीर्ति An Acharya; disciple of Anantveerya. आचार्य ई. 990-1040 में अनंतवीर्य के शिष्य व गुणकीर्ति के सहधर्मा थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == दु:खमुक्ति : == तस्यैष मार्गो गुरुवृद्धसेवा, विवर्जना बालजनस्य दूरात्। स्वाध्यायैकान्तनिवेशना च, सूत्रार्थसंचिन्तनता धृतिश्च।। —समणसुत्त : २९० गुरु तथा वृद्धजनों की सेवा करना, अज्ञानी लोगों के सम्पर्क से दूर रहना, स्वाध्याय करना, एकान्तवास करना, सूत्र और अर्थ का सम्यक् चिन्तन करना तथा धैर्य रखना—(ये दु:खों से मुक्ति के) उपाय…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोकर्म वर्गणा – Nokarma Varganaa. 19 Varganas out of 23 excluding Karmamn, Bhasha, Mano & Tejas. कुल 23 वर्गणाओं में से कार्मण, भाषा, मनो, तैजस इन 4 को छोड़कर 19 वर्गणाएं “
दृष्टिविष ऋद्धि A type of supernatural power (reg. a look causing curse). जिसके बल से रोषयुक्त हृदय वाले महर्षि के द्वारा देखा गया जीव सर्प द्वारा काटे गये के समान मर जाता है। जैन साधु इस ऋद्धि का कभी उपयोग नहीं करते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वत्सा –Vatsaa: Name of a country of Videh Kshetra (region). जम्बू द्वीप के विदेह क्षेत्र में सीता नदी और निषध पर्वत के मध्य स्थित 8 देशों में प्रथम देश “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोआगम द्रव्य भाव – Noaagama Dravya bhaaava. A type of Bhav Nikshep. भाव निक्षेप का एक भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाति – Bhiti. Fear, A super power possessed by Ravana, creating fear to enemy. भय, रावण को प्राप्त एक विधा ” इस विधा से शत्रु पक्ष में भय उत्पन्न किया जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैमित्तिक दुःख – Naimittika Dukha . Distress arising due to external causes. बाह्य निमित्तों से उत्पन्न दुख “
दूरभव्य False believers. मिथ्यादृष्टि जीव, जो बहुत ज्यादा काल में मुक्त होते है अर्थात् जो आगे जाकर ये स्वीकार करेंगे कि केवली भगवान् का सुख सर्व सुखों में उत्कृष्ट है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रनंदि – Vajranandi Name of a disciple of Gunnandi of Nandi group and a disciple of Acharya Pujyyapad who established Dravid group. नंदिसंघ बलात्कारगण के अनुसार गुणनंदि के शिष्य तथा कुमारनंदि के गुरु ” समय –ई . 442 – 464 ,आचार्य पूज्यपाद के शिष्य ” गुरु से बिगड़कर द्रविड़संघ की स्थापना की ” कृतियां…