आलब्ध!
आलब्ध An infraction in meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आलब्ध An infraction in meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजाक्षर – Bijaksara. Essenceful mystic & chanting words. संक्षिप्त शब्द रचना से सहित व अनंत अर्थो के ज्ञान के कारण अनेक चिन्हों से सहित अक्षर ” जैसे, ॐ , ह्रीं, अर्हं इत्यादि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राज्योत्तम – रूचक पर्वत पर स्थित एक कूट। यहां रूचकदेवी का निवास है जो तीर्थकर के जन्म में सेवार्थ जाती है। Rajyottama-A summit situated at mountain
आयोध्य Title of a jewel ‘Senapati’ (army chief) of Chakravarti (emperor) चक्रवर्ती के चौदह रत्नों में सेनापति नामक रत्न की संज्ञा।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वाणकल्याणक वन्दना – Nirvanakalyanaka Vandanaa. A devotional prayer related to the holy event of salvation of Lord Arihant. कृतिकर्म; सिद्ध – श्रुत – चारित्र – योगी-निर्वाण व शांति भक्ति करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ललित कीर्ति – यषकीर्ति न 3 के गुरू और रत्ननंदी द्वि के षिक्षा गुरू। समय ई – 1214, काश्ठसंघी जगतकीर्ति के षिश्य एक मंत्रवादी। कृति महापराण टीका। नंन्दीष्वर व्रत आदि 13 कथाएं। Lalitakirti-Name of saints-(1) Spiritual teacher of ratnanandi-II (2) The disciple of Jagatkirti of Kashtha Group
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजरूचि – Bijaruci A type of noble persons who get right faith by knowing bijapadas दर्शनार्य का एक भेद ; बिजपदों के ग्रहणपूर्वक सूक्ष्मार्थ तत्त्वार्थ श्रध्दान को प्राप्त करने वाले बिजरुची कहलाते हैं “.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रश्मिवेग – पुश्कलावती के विजयार्ध पर त्रिलोकोत्तम नगर के राजा विद्युतगति का पुत्र था।युवावस्था में दीक्षित हुआ, योग में लीन स्थिति में एक अजगर निगल गया।समाधिपूर्वक मरने से अच्यूत स्वर्ग के पुश्कर विमान मे देव हुअ्रा। Rasmivega-The son of kind Vidyutgati of Trilokottam city situated in Pushkalavati country of Vijayardh mountain
आसन्न मरण Supreme beings, who get salvated in short time. जो साधु संघ से भ्रष्ट हो बाहर निकल गया ऐसे स्वच्छन्द, कुशील व संसक्त साधु का मरण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्यान – Niryaana. To grt free from worldly tranmigration. संसार पर्यटन से निकल जाना निर्यान कहलाता है “