स्वार्थ!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वार्थ – Svaartha. Spiritual upliftment of own soul. प्रोपकार की अपेक्षा न करके स्व-अर्थ अर्थात् आत्मकल्याण करना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वार्थ – Svaartha. Spiritual upliftment of own soul. प्रोपकार की अपेक्षा न करके स्व-अर्थ अर्थात् आत्मकल्याण करना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] स्वात्म रक्षा – Svaatma Raksaa. Self defence, the principle of non-violence. शुद्व भाव या आत्म रक्षा। आगम मे स्व और अन्य प्राणियो की अहिंसा का सिद्वान्त स्वात्म रक्षा के लिये ही है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शरण : == ज्ञानं शरणं मम, दर्शनं च शरणं च चारित्र शरणं च। तप: संयमश्च शरणं, भगवान् शरणो महावीर:।। —समणसुत्त : ७५० ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप और संयम मेरे लिए शरण हैं। भगवान् महावीर मेरे लिए शरण हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांवत्सरिक प्रतिक्रमण – Saamvatsarika Pratikramana. A type of repentance carried on annually by jain saints. प्रतिक्रमण के 7 भेदो मे छठा भेद । देखे- वार्षिक प्रतिक्रमण।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठित प्रत्येक वनस्पति- जिस वनस्पति का आश्रय निगोद या साधारण वनस्पति रहे। pratisthita pratyeka vanaspati – general plant life (one sensed beings)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषमधारा – Vishamadhara. Sequence of odd numbers. १४ धाराओं में एक धारा; १ से लगाकर केवलज्ञान के अंशों तक विषम संख्या की पंक्ति ” जैसे – १, ३, ७ आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठा विधान- प्रतिश्ठा संबंधि- विधान। pratistha vidhana – reverential procedure for consecrational celebration
देवमूढता Believing in false deities. मिथ्यादेवों की आराधना करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रघुम्नचरित्र- आचार्य सोमकीर्ति (ई. 1474) एवं आचार्य सोमाकृति (ई. 1516-1556) द्वारा रचित ग्रंथ। pradyumnacaritra – name of the books written by (1) acharya somkirti, (2) acharya shubhachandra