शुद्धाशुद्धोपयोग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धाशुद्धोपयोग – Shuddhashuddhopayoga. Passionless and passionful conduct. शुद्ध व अशुद्ध उपयोग का मिश्ररूप “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धाशुद्धोपयोग – Shuddhashuddhopayoga. Passionless and passionful conduct. शुद्ध व अशुद्ध उपयोग का मिश्ररूप “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सन्मति – Sanmati. The other name of Lord Mahavira, Name of the 2nd Kulkar (ethical Founder). भगवान महावीर का अपरनाम, यह नाम पालने मे झूलते बालक वद्र्वमान को देखकर संजय और विजय नामक चारण ऋद्विधारियो ने अपना संदेह दूर होने पर रखा था। प्रतिश्रुति कुलकर का पुत्र दूसरा कुलकर। इन्होने प्रजा को ज्योतिष विघा…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगदर्शन – एक दर्षन जो ध्यान धारणा समाधि आदि के द्वारा तत्वों का साक्षात् करने का उपाय सुझाता है। Yogadarsana-name of a philosophy
गुणारोपण Imparting attributes – the ceremony of consec- ration of an idol. प्रतिष्ठा विधान की विधि का एक भेद ; प्रतिमा में गुणों का आरोपण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लयन कर्म – कर्म का एक भेद लयन अर्थात पर्वत, उसमे निर्मित प्रतिमाओ का नाम लयन कर्म है। Layana Karma-Scripture to carve out lord idol in the mountain
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंदरार्य: Name of the disciple of Acharya Arhadbali. आचार्य अर्हद्बबली के शिष्य तथा मित्र वीर के गुरु का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रिक प्रतिक्रमण – रात्रि में हुए दोशों का जो प्रतिक्रमण प्रात सामायिक से पूर्व किया जाता है वह रावित्रक प्रतिक्रमण कहलाता है। Ratrika Pratikarmana- penitential retreat, an observation of Jaina saints pertaining to night infraction
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विडौषधि ऋद्धि –Vidaushadhi Riddhi.: A supernatural power-curing the diseases of beings with excreta of saints. जिसके प्रभाव से साधु का मल-मूत्र भी जीवों के रोगों को नष्ट करने में समर्थ होता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंडित: Including, A city situated in the south of Vijayardh mountain. सहित, समन्वित, विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यशोधचरित्र – वादिराज द्वि ई 1010 – 1065 कृत, कवि पùनाथ ई 1405 – 1425 कृत, सकलकीर्ति ई 1406 – 1442 आदि विद्वानो द्वारा इस विशय के कइ ग्रन्थ रचे गए है। Yasodharacaritra-A character portrayal by many writers