पुराकल्प!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराकल्प – Purakalpa. Old time pertaining to traditional theory. एतिह्या सहचरित विधि को पुराकल्प कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराकल्प – Purakalpa. Old time pertaining to traditional theory. एतिह्या सहचरित विधि को पुराकल्प कहते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववती शक्ति – Bhavavati Sakti. Volitional strength of something. द्रव्य की एक शक्ति; प्रदेशत्व गुणों के अतिरिक्त शेष गुणों के परिणाम की भाव रूप शक्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञापरिषहजय – Pragyaaparishahajaya. Proudlessness of knowledge or intellect (sagacity with proudlessness). अनेक शास्त्रों में निपुण होते हुए भी जो साधू अपने ज्ञान का अभिमान नहीं करता, समता रखता है “
द्रव्य लिंग Physical sign or appearance (related to a saint). बाहरी भेष, साधु का बाहरी चिन्ह, परिग्रह रहित व पिच्छी कमण्डलु सहित होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य पाप Sinful nature of Karmas (substantive sin). कर्म की पाप रूप 100 प्रकृतियां ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजंगिनी – Bhujangini. One of the super power possessed by Ravan. रावण को प्राप्त अनेक विधाओं में एक विधा “
द्रव्य ध्येय To concentrate mind on the virtuous matters. अध्यात्म वेत्ताओं के अनुसार 4 प्रकार के ध्येय पदार्थों में एक सत् या गुणपर्यायवान् पदार्थ में एकाग्र होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == जयश्री : == सव्वायरेण रक्खह तं पुरिसं जत्थ जयसिरी वसइ। अत्थमियम्मि मियंके तारेहिं न कीरए जोण्हा।। —गाहारयण कोष : ७८० जिस पुरुष में जयश्री निवास करती है, उसका सब प्रकार आदर के साथ रक्षण करो क्योंकि चन्द्र के अस्त होने पर तारों से प्रकाश नहीं होता। सुच्चिय सूरो…
द्रव्य अप्रत्याख्यान Lust or desire for illusive matters. रागादि विषयों की आकांक्षा रूप अप्रत्याख्यान के दो भेदों में एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदकल्पना – निरपेक्ष – शुद्ध – द्रव्यार्थिक नय –A viewpoint explaining the solitariness in properties (virtues) and its possessor (matter). नय; जिसकी अपेक्षा द्रव्य निज गुण पर्यायों के स्वभाव सेअभित्र है तथा एक स्वभावीहै “