रघुनाथ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रघुनाथ – न्यायदर्षन में नव्यन्याय के प्रसिद्ध प्रणेता, श्रीरामचन्द्र जी का अपरनाम। Raghunatha-Name of a great judiciary founder, Another name of Shri Ram
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रघुनाथ – न्यायदर्षन में नव्यन्याय के प्रसिद्ध प्रणेता, श्रीरामचन्द्र जी का अपरनाम। Raghunatha-Name of a great judiciary founder, Another name of Shri Ram
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठाचार्य- जिनबिम्बादिक की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कराने वाला जिनधर्म का दृढ श्रद्धानी, सदाचारी, शास्त्रज्ञ, निश्चय व्यवहार का ज्ञाता, देष कुल जाति से शुद्ध त्यागी या गृहस्थ श्रावक। pratisthacharya – the cheif one, the installator in the consecration celebration of ido installation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपगताचूलिका – द्वादषांग श्रुतज्ञान के दृश्टिवाद अंग के 5 भेदो मे चूलिका कर एक उपभेद।जिसमें सिंह आदि आकृति धारण करने के मंत्र – तंत्र का वर्णन है। Rupagataculika-A type of scriptural knowledge (Shrutgyan) containing description of mystical theory
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशापचय- प्रदेषें की न्यमनता या ह्नास। pradesapacaya – deterioration of space points
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यमनोयोग – Satyamanoyoga. Vibration in soul points for having right knowledge. मनोयोग के 4 भेदों में एक भेद ” यथार्थ पदार्थों के ज्ञान उत्पन्न करने की शक्ति के लिए भाव मन की चेष्टा रूप योग से आत्मप्रदेशों का सकम्प होना सत्य मनोयोग है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेश- आकाष के एक अविभगी अंष का नाम प्रदेष है अथवा आकाष का वह अंष जिसको एक अविभागी पुद्गल परमाणु रोके। pradesa – space point, location, point as decimal place.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोगकर्म- कर्म का एक भेद; यह मन, वचन, काय प्रयोग कर्म के भेद से 3 प्रकार का होता है। Prayogakarma –A type of Karma
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निपिबद्ध – लिखा हुुआ द्रव्यश्रुत जो 64 अक्षरो एवं पदो के द्वारा लिखा जाता है। Lipibaddha-Something put in writing form
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमेय- द्रव्य पर्याय रुप वस्तु ही प्रमेय है। प्रमाण (ज्ञान) से जो जाना जाये। Prameya- Object to be known completely