गति-अगति(गुण प्राप्ति)!
गति-अगति(गुण प्राप्ति) Possibility of virtues in different body forms (Gatis). किस गति से किस गति में उत्पन्न जींव कौन-कौन से गुण उत्पन्न करने योग्य हो सकता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गति-अगति(गुण प्राप्ति) Possibility of virtues in different body forms (Gatis). किस गति से किस गति में उत्पन्न जींव कौन-कौन से गुण उत्पन्न करने योग्य हो सकता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्व पक्ष – Poorva Paksha. Prime facie view. वाद-विवाद के दौरान वादि के द्वारा प्रस्तुत किया गया प्रथम पक्ष “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पतन:Decay, decline, An obstacle in saints food (sudden falling down of a saint while taking food). गिरना, च्युत होना, आहार लेते समय यदि साधु मूर्छा आदि आने से गिर पड़ते है तो यह पतन नाम का अंतराय है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूककेवली–Mukakevali. Silent omniscient (having without resonant sound). कोई–कोई केवली उपदेश नहीं देता अर्थात दिव्यध्वनी नहीं खिरती उन्हें एककेवली कहते है”
खेटक Villages, one of glories of Baldev. गाँव, बलदेव के वैभवों में एक वैभव. ८००० खेटक बलदेव के आधीन होते हैं । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष क्षेत्र – Vishesha.Kshetra. A type of particular spacious region. केवल प्रदेश सामान्य क्षेत्र तथा यह वस्तु का प्रदेश रूप अंशमयी अर्थात् अमुक द्रव्य इतने प्रदेश वाला है, इत्यादि विशेष क्षेत्र कहलाता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पटदेवी : The chief female deities of Indras. भवनवासी इन्द्रो की देवियाॅं, प्रधान देवी, पटरानी, महिषी ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुंड– Mund. Controlling of sensual organs for following non–violence. 5 इन्द्रियों को वश में करना, 5 इन्द्रिय, वचन, हस्त, पाद, मन और शरीर बिना प्रयोजन काम में ना लेना, यह मुंडन कहलाता है ” इससेअहिंसा का पालन होता हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संबोधि : == खचरामरमनुज—करांजलि—मालाभिश्च संस्तुता विपुला। चक्रधरराजलक्ष्मी:, लभ्यते बोधि: न भव्यनुता।। —समणसुत्त : २०४ (इसमें संदेह नहीं कि) शुभ भावों से विद्याधरों, देवों तथा मनुष्यों की करांजलिबद्ध स्तुतियों से स्तुत्य चक्रवर्ती सम्राट् की विपुल राज्यलक्ष्मी (तक) उपलब्ध हो सकती है, किन्तु भव्य जीवों द्वारा आदरणीय सम्यक्—सम्बोधि प्राप्त नहीं…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यंजन –Vyainjana. Consonant (33), Delicious food items, symbolic marks on the body or any matter. अव्यक्त शब्ददी (आधी मात्रा वाले अक्षर) के समूह या वचन को व्यंजन कहते हैं, क् ख् ग् आदि अक्षर ” इन व्यंजन को स्वर के साथ संयुक्त करने पर ही इनका उच्चारण होता हैं ” जैसे –…