भाववेद!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववेद – Bhavaveda. Psychic libido. वेद नोकषाय के उदय से मैथुन भाव होना, इसके ३ भेद हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववेद – Bhavaveda. Psychic libido. वेद नोकषाय के उदय से मैथुन भाव होना, इसके ३ भेद हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रृंखलित – Shrinkhalita. Fettered like standing, an infracting of posture of meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक दोष; बेडी से जक्स्दे मनुष्य की भांति खड़े होना “
चित्रा पृथिवी Name of an earth of middle universe with 1000 Yojanas. मध्यलोक की १००० योजन मोती पृथिवी का नाम यह चित्र विचित्र अनेक धातुओं , मणियों से युक्त होती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशुध्दि – Vishuddhi. A state of lack of passions. संक्लेश परिणामों की हीनता अथवा साता वेदनीय कर्म के बन्ध में कारणभूत विशुध्द परिणाम “
चन्द्रकान्त A king of Yadu dynasty. वासुदेव का पुत्र. यदुवंश का राजा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधि संधारणता – Samaadhi Sandhaaranataa. Engrossment into deep meditation for holy death. समयक् प्रकार से समाधि धारण करने की भावना का नाम समाधि संधारणता है। इससे तीर्थकर नामकर्म का बंध होता है। षट्खण्डागम सूत्र मे सोलहकारण भावनाओ मे यह एक भावना कही है।
चर्याश्रावक Observance of a householder. अभ्यासी श्रावक का आचरण ; दर्शन प्रतिमा से अनुमति त्याग प्रतिमा तक ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधिमरण – Samaadhimarana. The holy death of saints. सल्लेखना, इसमें शरीर मे ममत्व छोड़कर देह का विसर्जन किया जाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभोपयोगी – Shubhopayogee. One involved in auspicious conduct. जो देशचारित्र अथवा सकलचारित्र का पालन करते हुए धर्म क्रियाओं में लीं रहते हैं, वे शुभोपयोगी श्रावक या मुनि कहलाते हैं “