परमौदारिक शरीर!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परमौदारिक शरीर:Body of Lord Arihant with absolute purity.अहंत परमात्मा का शरीर जिसमें निगोदिया जीव नहीं रहते ,धातु उपधातु सब शुद्व हो जाती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परमौदारिक शरीर:Body of Lord Arihant with absolute purity.अहंत परमात्मा का शरीर जिसमें निगोदिया जीव नहीं रहते ,धातु उपधातु सब शुद्व हो जाती है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्यानुवाद (पूर्व) – Vidyanuvada (Purva). One of the (10th) great 14 parts of scriptures containing the description of a number of su-pernatural powers. १४ पुर्वों में १०वां पूर्व, इसमें ७०० लघु विद्याएँ और रोहिणी आदि ५०० महाविद्याओं का वर्णन है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संश्लेष – Sanshlesa. Act of synthesising or combining. मिलना ” स्निग्धत्व और रुक्षत्व गुण से अणु आदि का बंध होना “
देशसंधि The joining land of two countries (borders). दो देशों की सीमा भूमि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
एकचर्या A vow for saints, solitary walking. मुनियों का एक व्रत, एकाकी विहार करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामर्थ्य – Saamarthya. Capability, competence, capacity. शक्ति, बल (जीव में मोक्ष को प्राप्त करने की सामर्थ्य है) ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमकगिरी–Yamakgiri. See – Yamak. देखे–यमक” गोल, उचाई 1000 योजन, नीचे की चौड़ाई 1000योजन, ऊपर की चौड़ाई 500 योजन” इन पर इसी नाम के धारक देव रहते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधु प्रासुक परित्यागता – Saadhu Praasuka Pariytaagataa. A great & meaningful renouncement(reg. perception, knowledge & faith) done by Jaina saints. दया बुद्धि से साधुओं के द्वाराकिये जाने वाले दर्शन, ज्ञान व चारित्र के परित्याग या दान का नाम प्रासुक परित्यागता है। षट्खंडागम के अनुसार 16 कारण भावनाओं में यह एक भावना ।
ऋषभजयन्ती व्रत Vow of the birthday celebration of Jaina-Lord Rishabhadev. भगवान आदिनाथ की जयन्ती चैत्र कृष्ण 9 को उपवास व पूजन।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्नेह : == नियलेहि पुरिओ च्चिय वच्चइ पुरितो जहिच्छियं देसं। एक्कं पि अंगुलमिणं, न जाइ घणनेह—पडिबद्धो।। —पउमचरिउ : ५६९ जंजीरों से बंधा हुआ मनुष्य इच्छानुसार देश में जा सकता है, पर घने स्नेह से जकड़ा हुआ मनुष्य एक अंगुल भी नहीं जा सकता।