षण्मुख!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षण्मुख – Sanmukha. Name of the demigod of Lord Vasupujya. तीर्थंकर वासुपूज्य के शासन देव का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षण्मुख – Sanmukha. Name of the demigod of Lord Vasupujya. तीर्थंकर वासुपूज्य के शासन देव का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विराट – Virata. Name of a country, the old name of Barar. एक देश, राजा विराट यहाँ के राजा थे वनवासी पांडवों ने छध्वेश में इसी का आश्रय लिया था (बरार देश का पूर्व नाम) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभूत – Sanbhoota. Born from or originated from. बनाया हुआ या उत्पन्न किया हुआ “
आनन्दसागर(आचार्य) Name of a saint, the disciple of Acharya Shri Munisuvratsagar Maharaj. आचार्य श्री मुनिसुव्रतसागर महाराज के शिष्य (ई.श.20-21)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभावना सत्य – Sanbhaavanaa Satya. Truth pertaining to probability or possibility. वस्तु के स्वभाव को कहने वाला वचन या जैसी इच्छा रखे वैसा कर सके यह संभावना सत्य है ” जैसे- इच्छा करे तो इन्द्र जम्बूद्वीप को पलट सकता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेत – Shveta. The initiation & omniscience forest of Lord Mallinath. तीर्थंकर मल्लिनाथ का दीक्षा एवं केवलज्ञान वन “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध उत्सरण -बंध का उत्कर्षण (बढ़ना) होना । BandhaUtsarana- Bond progression.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेणीचारण ऋद्धि – Shreneechaarana Riddhi. A type of super natural power related to the careful walking over smoke, fire etc. एक चारण ऋद्धि जिसके प्रभाव से धूम, अग्नि पर्वत और वृक्ष के तन्तु समूह पर से ऊपर चढ़ने की शक्ति प्राप्त होती है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == ध्यान : == मोक्ष: कर्मक्षयादेव, स चात्मज्ञानतो भवेत्। ध्यानसाध्यं मतं तच्च, तद्ध्यानं हिममात्मन:।। —योगशास्त्र : ४-११३ कर्म के क्षय से मोक्ष होता है, आत्मज्ञान से कर्म का क्षय होता है और ध्यान से आत्मज्ञान से कर्म का क्षय होता है और ध्यान से आत्मज्ञान प्राप्त होता है। अत: ध्यान…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतपंचमी क्रिया – Shrutapanchmee Kriyaa. A religious devotional procedure of eulogy. ज्येष्ठ शु. 5 को श्रुतपंचमी कहते हैं ” इस दिन सभी साधु बृहत् सिद्ध भक्ति और बृहत् श्रुत भक्ति पढ़कर श्रुतस्कंध की स्थापना करके श्री इंद्रनंदि आचार्य विरचित श्रुतावतार का उपदेश देने के अनन्तर बृहत् श्रुत भक्ति व बृहत् आचार्य भक्ति पढ़कर स्वाध्याय…