पुरुषवेदकर्मप्रकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेदकर्मप्रकृति – Purusavedakarmaprakrti. Name of the Karmic nature of male causing lust for female. जिस वेदकर्म के उदय से स्त्री में रमण करने की चाह हो “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेदकर्मप्रकृति – Purusavedakarmaprakrti. Name of the Karmic nature of male causing lust for female. जिस वेदकर्म के उदय से स्त्री में रमण करने की चाह हो “
तिर्यग्गतिप्रायोग्यानुपूर्वी Existence of old body form before taking the new birth (reg. Tiryanch Gati). वह नामकर्म जिसके उदय से तिर्यचगति में जाते हुए विग्रहगति में पूर्व के शरीर के आकार के समान जीव (आत्मप्रदेश ) का आकार बना रहे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रणिधि – Pranidhi. A type of deceit or illusion. माया का एक भेद ” व्यापार आदि में हीनाधिक कीमत की सदृशवस्तुओं को मिलाना ( जैसे-सोने में ताँबा आदि), वस्तुओं को तोलने में हेराफेरी करना आदि रूप मायाचार है “
तिर्यंच पंचेन्द्रिय All animals (except human beings) having 5 sense-organs. मनुष्य को छोडकर पांच इंन्द्रियों वाले समस्त पशु पक्षी इत्यादि जीव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रचय – Prachaya. Accumulation, collection, Togetherness. समूह, संग्रह, संचय, साधारण मेलजोल “
तिथि Traditional date, Date of a lunar or solar month. भारतीय परम्परा में अनादिकाल से प्रचलित प्रत्यके माह के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की तिथियाँ जो तिथि तीन मुहूर्त या छः घड़ी उदय में हो उसको मानना चाहिए। हर एक तिथि का प्रमाण 54 घड़ी से 65 घड़ी तक या कुछ कम 66 घड़ी का होता…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्योपजीवन – Vidyapajivana. A fault of food and hermitage related to saint (to attract donor with mystical knowledge). आहार एवं वसतिका का एक दोष; दातार को मंत्र तंत्रादि बताकर आहार एवं वसतिका प्राप्त करना साधु का विद्योपजीवी नामक दोष है “
तर्जित An infraction in paying reverence to Acharyas. वंदना का एक अतिचार तर्जनी अंगुली के द्वारा अन्य साधुओं को भय दिखाते हुए अथवा आचार्य आदि से स्वयं तार्जित होकर वंदनादि करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ताप To have pain, distress, mental agony. असातावेदनीय के आस्रव का कारण अपवाद आदि के कारण अपवाद आदि के कारण खिन्न हो तीव्र संताप होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तरेसठ शलाकापुरूष चरित्र Name of a famous saint, the disciple of Acharya Shri Pushpadantsagar Maharaj. चामुण्डराय द्वारा रचित संस्कृत भाषाबद्ध एक रचना (ई.श.10-11)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]