पाद मुण्ड!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाद मुण्ड :Controlling of feet-activities by Jain Sainth (in samayik etc).जैन मुनियो के दस प्रकार के मुण्डन मे से एक, सामायिक इत्यादि के समय स्वच्छदापूर्वक पगो का संकोच व विस्तार न करना, पगो की क्रियाओ को वश मे रखना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाद मुण्ड :Controlling of feet-activities by Jain Sainth (in samayik etc).जैन मुनियो के दस प्रकार के मुण्डन मे से एक, सामायिक इत्यादि के समय स्वच्छदापूर्वक पगो का संकोच व विस्तार न करना, पगो की क्रियाओ को वश मे रखना।
त्रिपृष्ठ One of the past birth of Lord Mahavir who was the first Narayan in the time of Lord Shreyansnath. भगवान महावीर के पूर्व भव में एक भव – श्रेयांसनाथ भगवान के समय में हुआ प्रथम नारायण, जो बाद में महावीर स्वामी हुए। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकरण – Prakarana. Topic, Section, Part. विषय, प्रसंग, किसी कृति का छोटा भाग “
चतुरिन्द्रिय Four – sensed beings. स्पर्शन , रसना , घ्राण , चक्षु ये ४ इन्द्रियाँ जिन जीवों के होती हैं वे चतुरिन्द्रिय जीव हैं . जैसे -मक्खी , मच्छर आदि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
थोस्सामिदंडक A lesson for the prayer of Jaina Lord . थोस्सामिहं जिणवरे-इत्यादिरूप एक चौबीस तीर्थंकर स्तुति का प्राकृत पाठ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रैलोक्यजिनालयव्रत A type of vow (fasting) to be observed for different 48 days in regard to different temples of Teenlok (three worlds). तीन लोक में अकृत्रिम – शाश्र्वत जिन मंदिर 856, 97, 481 है। अधोलोक के भवनवासी देवों के 10 भेदों के मंदिरों की अपेक्षा 10, मध्यलोक के पंचमेरू आदि के 12, वयतरों के 8,…
त्रिषष्टि कर्म प्रकृति Sixty three types of Karmic nature (which are destroyed by Lord Arihant). 63 कर्म प्रकृतियां ,जिनके नाश से अरहंत परमेष्ठी होते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिक्कुमारी Eight particular female deities who come to serve the mother of Tirthankars (Jaina-Lords). श्री, ह्री, घृति, कीर्ति , बुद्धि, लक्ष्मी, शांति और पुष्टी से आठ दिक्कुमारी देवियाँ हैं जो तीर्थंकर माता की सेवा करने के लिए आती है (प्रतिष्ठा तिलक के आधार से)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]