मिश्र औदरिक कयायोग!
[[श्रेणी :शब्दकोष ]] मिश्र औदरिक कयायोग–Mishra Oudarik Kayayoga. See –Oudarik Mishra Kayayoga. देखे–औदरिक मिश्रकयायोग”
[[श्रेणी :शब्दकोष ]] मिश्र औदरिक कयायोग–Mishra Oudarik Kayayoga. See –Oudarik Mishra Kayayoga. देखे–औदरिक मिश्रकयायोग”
आपवादिक लिंग White clothed Digambar Jain ascetics etc. परिग्रह सहित भेष या चिन्ह, आर्यिका (उपचार महाव्रती) ऐकल क्षुल्लक आदि जैनधर्म में दो मार्गं हैं- उत्सर्ग मार्ग और अपवाद मार्ग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेरुधन–Merudhan. Name of a chief disciple of Lord Adinath. भगवान्आदिनाथ के एक गणधर का नाम”
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदविभागी: A kind of Criticism, A kind of good conduct of saint. आलोचना का एक भेद, क्षेपक क्षरा आचाय्र्र के आगे क्रम से दोषो की आलोचना करना, साधुओं के क्षरा की जाने वाली समाचारी विधि का एक भेद, समस्त दिन एवं रात की परिपाटी में मुनियों क्षरा नियामें का निरन्तर आचरण करना ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पतिव्रत: Loyalty of fidelity to a husband-a characteristic of India calture. भारतीय संस्कृति में नारी का एक विषेष धर्म अपने पति के प्रति एकनिश्ठ समर्पण एवं भक्ति का भाव रखना व अन्य पुरूष के प्रति पिता, पुत्र एवं भाई के समान भाव एवं व्यवहार रखना ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार]] [[ श्रेणी:शब्दकोष]] == कायोत्सर्ग : == दैवसिकनियमादिषु, यथोक्तमानेन उक्तकाले। जिनगुणचिन्तनयुक्त:, कायोत्सर्गस्तनुविसर्ग:।। —समणसुत्त : ४३४ दैनिक प्रतिक्रमण के नियमानुसार यथोचित समयावधि (२७ श्वासोच्छ्वास) तक जिनप्रभु के गुणों का चिन्तन करते हुए शरीर की ममता को छोड़ देना कायोत्सर्ग है। देहमति: जाड्यशुद्धि: सुखदु:ख—तितिक्षता अनुप्रेक्षा। ध्यायति च शुभं ध्यानम् एकाग्र: कायोत्सर्गे।। —समणसुत्त : ४८१ कायोत्सर्ग करने…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेदार्य–Medarya. Name of the 10th chief disciple of Lord Mahavira. तीर्थंकर महावीर के 10वे गणधर का नाम”
देवमंत्री Ruling deity of 6th Lunar ‘Pushya’. छठवें नक्षत्र ‘पुष्य’ के अधिपति देवता का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]