ग्रहाङ्ग!
ग्रहाङ्ग A type of wish fulfilling trees (Kalpavrikshas). कल्पवृक्षों का एक भेद; जो आवश्यकतानुसार राजमहल , सभाग्रह आदि देते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ग्रहाङ्ग A type of wish fulfilling trees (Kalpavrikshas). कल्पवृक्षों का एक भेद; जो आवश्यकतानुसार राजमहल , सभाग्रह आदि देते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक–Vaikriyika. Transformable body (reg. big & small, heavy & light body) शरीर का एक प्रकार; देव और नारकियो के शरीर विशेष को वैक्रियिक कहते हैं ” यह छोटे – बडे, हल्के – भारी अनेक प्रकार के रूपों में परिवर्तित किया जा सकता हैं “
”गिरिदारिणी” A divine power possessed by ‘Ravan’. रावण को प्राप्त एक विद्या ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृष्य –Vrsya. Intoxication food or passion stirring liquids. अभिषय या कामोद्दीपक रस “
गिरिकूट A mountain of Bharat kshetra ( a region) near Eravati river. ऐरावत नदी के पास स्थित भरत क्षेत्र का एक पर्वत ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वांग – Poorvaanga. A particular long time period. काल का एक प्रमाण विशेष ” 84 लाख वर्ष प्रमाण काल “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृदंगमध्य व्रत–Mradngmadhya Vrat. A particular type of fasting. एक व्रत जिसमे क्रमशः 2,3,4,5,4,3,2 उपवास एवं बीच के खली दिनों में पारणा कीजाती है” इसमें23 उपवास 7 पारणाएँ की जाती है”
गतिगति-अगति(गुणस्थान प्राप्ति) Probability of getting any body form (Gati) after dying from one spiritual stage (Gunsthan). गुणस्थान से गति सामान्य अर्थात् किस गुणस्थान से मरकर जीव जिस गति में उत्पन्न हो सकता है और किसमें नहीं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वभाव प्रज्ञापन नय – Poorvabhaava Pragyaapana Naya. See – Poorva Pragyaapana Naya. देखें – पूर्व प्रज्ञापन नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीपाल – Prthivipala. Name of the writer of ‘Shrut Panchami Rasa’, Name of a Pandit. पानीपत का निवासी था, वि. १६९२ में श्रुत पंचमी रास की रचना की, एक पंडित; व्रत कथाकोष छंद के कर्ता “