भाव प्रत्याख्यान!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव प्रत्याख्यान – Bhava Pratyakhyana. Internally renunciation of inauspicious deeds. अशुभ परिणामों का मैं त्याग करूंगा ऐसा संकल्प करना भाव प्रत्याख्यान है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव प्रत्याख्यान – Bhava Pratyakhyana. Internally renunciation of inauspicious deeds. अशुभ परिणामों का मैं त्याग करूंगा ऐसा संकल्प करना भाव प्रत्याख्यान है “
उदय Rising (of Sun etc.), Fruition (of Karmas), Name of the 19th planet सूर्य का उदित होना द्रव्यो क्षेत्र काल भाव के अनुरूप कर्मों के फल का प्राप्तn होना ८८ ग्रहों में १९ वाँ ग्रह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भैंसा:Buffalo bull, the significant mark of lord Vasupujya. एक पशु; वासुपूज्य भगवान का चिन्ह “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नराषि – चमकते हुए रत्नो का ढेर जो कि तीर्थकर की माता कांे 15 स्वप्न के रूप् मे दिखाई देते है जिसका अर्थ पुत्र गुणों की खान होगा। Ratnarasi- Sparkling jewels (the 15th dream mark of lord’s mother)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नत्रयचक्र यंत्र – एक यंत्र, जिस पर रत्नत्रय चक्र के मंत्र विभिन्न रेखाकृतिया बनाकर चित्रित किए जाते है। Ratnatrayacakra Yantra-A type of metallic engravd with some auspicious mystic words & diagrams
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिपाती – Pratipaatee. One falling from the stage of right conduct. सम्यकचारित्र से भ्रष्ट होकर असंयम में आने वाला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लतागृह – भवनवासी देवो के भवनो मे बना एक गृह। Latagrha-A part of the palace of residential deities
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिग्रह – Pratigrah. Acceptance, Receiving saints with respectful procedure for food offering. दिगम्बर जैन साधू-साध्वियों को आहार दान हेतु की जाने वाली नवधाभक्ति में से प्रथम भक्ति, जिसमे वर्तमान समय में “हे स्वामिन! ‘अत्र तिष्ठ, आहार जल शुद्ध है,” ऐसा कहकर साधू को आहार हेतु अपने घर मरण पधारने के लिए आह्वान किया जाता…