संख्यात गुणवृद्धि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संख्यात गुणवृद्धि – Sankhyaata Gunavriddhi. Multiplicative increase in numbers. किसी संख्या का संख्यात गुणा किसी में बढ़ाना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संख्यात गुणवृद्धि – Sankhyaata Gunavriddhi. Multiplicative increase in numbers. किसी संख्या का संख्यात गुणा किसी में बढ़ाना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रसारिताबाहु तप – कायक्लेष तप; दोनो बाहों को ऊपर करके खड़े होना। Prasaritabahu Tapa- A type of physical mortification, an external austerity
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध- मतिज्ञान का एक भेद; बहुत प्रकार के अलग-अलग पदार्थो का ज्ञान होना। Bahuvidha- A type of sensory knowledge pertaining to many objects
द्रोणामुख Port; docks. बंदरगाह; जलयानों के ठहरने का स्थान। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संख्या – Sankhyaa. Numbers or meaningful numbers, One of the eight Anuyogdvars (disquisition doors). गिनती, सत् प्ररूपणा में जो पदार्थों का अस्तित्व कहा गया है, उनके प्रमाण का वर्णन करने वाली संख्या हैं ” जीवादि पदार्थों के भेदों की गणना, यह 8 अनुयोग द्वारों में दूसरा अनुयोग द्वार है “
आनुपूर्वी नामकर्म प्रकृति A type of Karmic nature causing same shape of the soul-points of beings as the shape of their previous birth. जिसके उदय से विग्रहगति में आत्म प्रदेशों का आकार पिछले (छोडे़ हुए) शरीर के आकार का हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्रव्यांश Parts of a matter. द्रव्य का एक भाग उत्पाद व्यय घ्रौव्य रूप परिवर्तन पूरे द्रव्य में होता है किसी एक अंश में नहीं।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधोत्सरण- उत्कर्षण; स्थिति बंध को बढाकर एक एक अन्ततर्मुहुर्त तक समान बंध करना। Bandhotsarana- Bond progression
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाष्य सूक्ति – Bhasya Sukti. Name of a treatise written by jagadish Bhattacharya. वैशेषिक दर्शन सूत्र पर लिखी जगदीश भट्टाचार्य कृत एक व्रत्ति का नाम “
दण्डरत्न One of the 14 jewels of Chakravarti. 14 रत्नों में एक रत्न चक्रवर्ती का एक निर्जीव रत्न । यह सेना के आगे चलता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]