पद्मपुराण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मपुराण : Title of many books written by many Acharyas. आचार्य रविषेण (ई0 677) द्वारा राम-रावण कथा पर रचित संस्कृत पद्यबद्व एक ग्रंथ, और भी कई आचार्यो क्षरा इस नाम के ग्रथ रचे गये है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मपुराण : Title of many books written by many Acharyas. आचार्य रविषेण (ई0 677) द्वारा राम-रावण कथा पर रचित संस्कृत पद्यबद्व एक ग्रंथ, और भी कई आचार्यो क्षरा इस नाम के ग्रथ रचे गये है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भीमरथी – Bhimarathi. A river of Bharat kshetra Arya Khand. भरत क्षेत्र आर्य खण्ड की एक नदी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शांति – Shanti. Peace, Calmness, Pacification, Tranquillity, The 51st planet. माध्यस्थ्य, समता, वैराग्य, प्रशं, शांति ये सब एकार्थ्वाची हैं, 51वें ग्रह का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मकावती: Name of a country at the south bank of siroda river in Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र में सीतोदा नदी के दक्ष्णि तट पर एक देश।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैर –Vaira Hostility, Enmity, Name of a heavenly abode.Name of the 69th chief disciple of Lord Rishabhadev. विरोध, शत्रुता, ९ अनुदिश विमानों में तीसरा पश्चिम का श्रेणीबध्द विमान, भगवन वृषभदेव के ६९वे गणधर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शल्य – Shalya. Sting; thorn; something that causes pain to body or mind; anger, pride, illusion, greediness, love, lust, longings for next birth (Nidan) & wrong belief are 8 stings in this world. शल्य का अर्थ पीड़ा देने वाली वस्तु है ” अर्थात् शरीर और मन सम्बंधी पीड़ा का कारण, कर्मोदय जनित विकार या…
उपाधि Rank, Alien belonging, Attachment, Requisites. पदवी, संसार से मोह अर्थात साधन के साथ अव्यापक और साध्य के व्यापक हेतु को उपाधि कहा जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक द्विक –VaikriyikaDvik. A type of dyad pertaining to the transformable body (of deities & hellish beings). वैक्रियिक शरीर, वैक्रियिक अंगोपांग “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरसंघात नामकर्म – Shareera Sanghaata Naamkarma. Physique making Karmas causing association of body. जिसके उदय से औदारिक आदि शरीरों की छिद्र रहित होकर परस्पर प्रदेशों में एकरूपता आती है ” यदि शरीर संघात नामकर्म संज्ञा न हो तो तिल के मोदक के सामान शरीर अपुष्ट रहेगा “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पत्र समूह (जीर्ण) :Heap of leaves, The 16th dream of Bharat Chakravarti. भरत चक्रवर्ती का 16वां स्वप्न था जीर्ण पत्र समूह जिसका फल ’महाऔषधियों का रस नष्ट होना बताया गया था । यह फल वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप मंे देखा जा रहा है।