बीथी!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीथी – Bithi Tract, Orbit. गली, मार्ग “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वानप्रस्थ आश्रम – Vanprastha Asrama. The third progressive spiritual stage of mundane life. धर्म क्रियाओं के भेद से ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ. संन्यास इन चार आश्रमों में तीसरा भेद ” देखें- वाणप्रस्थ “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्ण कमल – Svarna Kamala. Gold lotus, one of the 14 transcendental creations of Lord Arihant (natural creation of gold/golden lotuses in all directions). सोने के कमल, अर्हत भगवान के 14 देवकत अतिषयो मे एक अतिषय, तीर्थकरो के श्रीविहार मे चरणो के नीचे एवं चारो दिषाओ मे व विदिषाओ मे स्वर्ण कमल की रचना…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पनसा:A river of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरत क्षेत्र स्थित आर्यखण्ड की एक नदी ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सद्भाव : == किं तेणावि घडिज्जइ जो न हु सब्भावरसनिसित्तो वि। पुरिसो य पुहइिंपगे व मिज्जिओ अप्पमप्पेइ। —गाहारयणकोष : ६५ जो सद्भाव के रस से अभिसिंचित नहीं है, उसके जन्म से क्या लाभ ? पुरुष तो पृथ्वी के िंपड जैसा होता है जो पानी से भीजकर अपने आपको…
उपशांत Unrevealed state of attachment and malice. राग द्वेष की अप्रगट अवस्था।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एवकार Exactly, Just (not liable to be changed). नियामक अध्यय- जैसे अर्जुन ही धुरंधर है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भंगविधि – Bhamgavidhi. A particular method for obtaining knowledge of something, synonym word for shrutgvan (scrip- tural knowledge). अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शील आदि भंग का जिसके द्वारा विधान किया जाता है उसे भंगविधि अर्थात् श्रुतज्ञान कहते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शौच : == समसंतोसजलेणं जो धोवदि तिव्व—लोहमल—पुंजं। भोयण—गिद्धि—विहीणो, तस्स सउच्चं हवे विमलं।। —समणसुत्त : १०० समता और संतोष के जल से जो तीव्र लोभ के मल—पुंज को धाया करता है, भोजन की लालसा से जो विहीन हुआ करता है, वह पवित्र शौच धर्म से संपन्न होता है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मौलि– Mauli. Crown with great lustre possessed by celestial beings. दैदीप्यमान मुकुट,इसेस्वर्ग के देव धारण करते है”