विवृत योनि!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवृत योनि – Vivrta Yoni. Opened female genital organ. योनि के ९ भेदों में एक भेद; खुला हुआ उत्पत्तिस्थान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवृत योनि – Vivrta Yoni. Opened female genital organ. योनि के ९ भेदों में एक भेद; खुला हुआ उत्पत्तिस्थान “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == व्यसन : == जूयं मज्जं मंसं वेसा पारद्धि—चोर—परयारं। दुग्गइगमणस्सेदाणि हेउभूदाणि पावाणि।। —वसुनंदीश्रावकाचार : ५९ जुआ खेलना, मदिरापान, मांसाहार, वेश्यागमन, शिकार खेलना, चोरी करना और परस्त्रीगमन करना, ये पाप की ओर तथा दुर्गति में ले जाने के कारण हुआ करते हैं।
एकीभावस्त्रोत्र A philosophical hymn written by Acharya Vadiraj. आचार्य वादिराज (ई. सन्. 1010-1065) कृत संस्कृत स्तोत्र जिसकी रचना करते हुए उनके शरीर का कुष्ठ रोग दूर हो गया था।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीकाय – Prthivikaya. Earth body (earthen), it is an inanimate form. पृथिवीकायिक जीव के द्वारा छोड़े गये शरीर को पृथिवीकाय कहते हैं ” जैसे – ईंट आदि ” जो अचेतन होते हैं “
एकान्तभावात्मक Merely existent, Lonely. एकान्त भाव से सहित।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विमलवाहन – Vimalavahana. Name of the 7th kulkar and the 11th predes-tined Chakravarti. (emperor). सातवे कुलकर – मनु, इन्होंने जनता को हाथी – घोड़े आदि की सवारी का उपदेश दिया ” आगामी ११ वें चक्रवर्ती “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सदार्चन – Sadaarcana. Regular worshipping. पूजा के 4 भेदों में एक भेद ” अपरनाम नित्यमह है, प्रतिदिन की जाने वाली पूजन “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावपूजा – Bhavapuja. Subjective worshipping, Psychical worshipping. अर्हन्तादि के गुणों का चिन्तन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Philosophical viewpoints for knowing about all beings (reg. right knowledge). सम्यग्ज्ञान को प्रमाण एवं प्रमाण के अवयव को नय कहतें हैं, इनकें द्वारा जीवादि पदर्थो का ज्ञान होता हैं “