वैदिश!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदिश –Vaidisa. Old name of the present Vidisha (a city) in Madhya Pradesh वर्तमान भेलसा या विदिशा “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदिश –Vaidisa. Old name of the present Vidisha (a city) in Madhya Pradesh वर्तमान भेलसा या विदिशा “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैमानिक देव –VAimanika Deva. Heavenly or celestial deities. सोलह स्वर्ग के निवासी देव ” जो विमानों से उत्पन्न होते है वे वैमानिक कहलाते हैं ” कल्पवासी और क्ल्पतित इनके २ भेद है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वप्न निमित ज्ञान – Svapna Nimitta Jnnaana. Knowledge caused due to dreams.स्वप्न के माध्यम से शुभशुभ को जान लेना स्वप्न निमित ज्ञान कहलाता है।
गणधर Chief disciple (Gandhar) of Teerthankar (Jaina lord). तीर्थंकर के प्रमुख शिष्य इनके अन्य नाम गणी, गणीश ,गणपति ,गणेश आदि भी हैं। ये समस्त श्रुत के पारगामी, सातों ऋद्धियों के धारक, मुनियों के स्वामी एवं चार ज्ञानधारी होते हैं। [[महावीर स्वामी के गणधर]] [[श्रेणी:शब्दकोष]]
जिनस्तुतिशतक Religious hymns written by Acharya Samant-bhadra and by Acharya Vasunandi. आचार्य समन्तभद्र (ई.श.२) एवं आचार्य वसुनन्दि (ई. १०४३-१०५३) कृत इस नाम के अलग-अलग स्तोत्र । ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वदार संतोष – Svadaara Sanntosa. Satisfaction with own wife.अपनी विवाहित स्त्री मे ही संतुष्ट रहना और शेष स्त्रियो के प्रति माता, बहन, पुत्रीवत् निर्मल भाव रखना। इसे ब्रह्मचर्याणुव्रत भी कहते है।
जयमित्रहल Name of the writer of ‘Mallivah Kavva’. अपभ्रंश कवि , ‘ मल्लीवाह कव्व ‘ के रचयिता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वचारित्र – Svacaaritra. Super right conduct.स्वरुपाचरण चारित्र अथवा वीतराग चारित्र का अपरनाम। 7वे गुणस्थान के अंत से इस चारित्र का प्रारम्भीकरण होता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष उपयोग – Vishesha. Special consciousness. ज्ञानोपयोग या साकारोपयोग, जो सामान्य – विशेशात्म्क पदार्थो के आकार को ग्रहण करे अर्थात् ज्ञान पदार्थो को विशेष करके जानता है “