बाह्य सल्लेखना!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य सल्लेखना – Bahya Sallekhana. Auspicious destruction of the body. शरीर को क्रश करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य सल्लेखना – Bahya Sallekhana. Auspicious destruction of the body. शरीर को क्रश करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वामन मुनि –Vaamana Muni.: Name of a writer of ‘Memandra Puran’(a treatise). मेमंदर पुराण के रचयिता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्यप्रकृति – Punyaprakrti. Meritorious Karmic nature (are 68 in Jaina philosophy). कर्मों की ६८ प्रकृतियाँ पुण्यरूप हैं, साता वेदनीय, नरकायु के बिना तीन आयु, उच्चगोत्र, मनुष्यदिक्, देवदिक्, पाँच शरीर आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] A chief disciple (Gandhar) of Lord Rishabhdev. ऋषभदेव भगवान के 84 गणधरों मे 34 वां गणधर।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैखरी –Vaikhari. A language, the power the speech. विविधता, विभिन्ता, आश्चर्य “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विष्णुनंदि –Visnunandi. Name of an omniscient after Lord Mahavira. भगवान महावीर के बाद हुए पंचम श्रुतकेवली, समय – ई. पू. ४६५-४५१, अपरनाम नंदि था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंजिका – Panjikaa. A descriptive book of odd items. वृत्तिसूत्रों के विषम पदों को स्पष्ट करने वाले विवरण को पंजिका कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मनाभ (कवि) : Disciple of Bhattarak Gunkirti. भटटारक गुणकीर्ति के षिष्य। समय ई0 1405.1425 ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मीन–Meen, Fish, a dream–mark of Lord’s mother, signification symbol of the 18th Lord Arahanath. जलचर प्राणी मछली, तीर्थंकर के गर्भावतरण के पूर्व माता को दिखने वाले 16 स्वप्नों में से 8वा स्वप्न, इस स्वप्न में माता को मछलियो का जोड़ा दीखता है, जिसका फल है पुत्र सुखी होगा, १८वे तीर्थंकर भगवान् अरहनाथ का…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैरत्याग –Vairatyaga. Renunciation of mutual hostility (absence of hostility among beings is an excellence of Lord Arihant) अरहंत भगवन का देवकृत एक अतिशय, जीव पूर्व वैर को छोड़कर आपस में मैत्री भाव से रहने लगते हैं “