याग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] याग – पूजा का पर्यायवाची नाम। Yaga-See- Yajna
चतुर्विध बंध Four types of Karmic bondage. ४ प्रकार का कर्मबंध ; प्रकृति , प्रदेश , अनुभाग , स्थिति बंध ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयमूढ़ता – Samayamoorhataa. Inclination towards false beliefs because of magnificence of wrong philosophy. आश्चर्य उत्पन्न करने वाले ज्योतिष, मंत्रवाद आदि को देखकर सर्वज्ञ कथित धर्म को छोड़कर मिथ्या देव-श्षास्त्र और खोटा तप करने वाले कुलिंगियो एवं कुधर्म को भय, वांछा और लोभ से प्रणाम, विनय, पूजा, सत्कार आदि करना समयमूढ़ता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्त्यानुषासत – आचार्य समन्तभद्र कृत सस्कृत में 64 ष्लोक ष्लोक प्रमाण स्तोत्र। Yuktyanusasana- name of a book written by acharya samantbhadraji
चामीकर यन्त्र A type of syringe; a water pump. जलक्रीड़ा में काम में आने वाला स्वर्णमाय यन्त्र (पिचकारी) ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम पात्र – Madhyam patra. Medium graded spiritual persons who follow rightenous observances. पात्र के तीन भेदों में एक भेद ; आर्यिका , सप्तम प्रतिमाधारी से उत्कृष्ट श्रावक (एलक- क्षुलल्क) मध्यम पात्र कहलाते हैं अथवा सम्यग्द्रष्टि देशवर्ती श्रावक मध्यम पात्र कहलाते हैं ” इसी प्रकार दिगंबर महामुनि उत्तम पात्र होते हैं एवं अविरत्त…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नत्रयविघान – एक पूजा ग्रथ जिस पर पं आषाघर (इ्र, 1173 – 1243) ने सेस्क्रत में टीका लिखी है। Ratnatrayavidhana- Name of a worshipping book
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगेन्दु देव – परमात्मप्रकाष योगसार, अध्यात्मसंदोह दोहापाहुड सुभाशित तं़त्र नौकार श्रावकाचार आदि संस्कृत अपभ्रंष ग्रंथों के रचियता एक दिगम्बराचार्य। समय ई ष – 6 Yogemdu Deva-Name of a great digambar, Acharya saint
चरम फालि The last resultant mixing of Karmic molecules. कर्मों की स्थिति घटाकर कर्म परमाणुओं को जो अंतसमय नीचे के निषेकों में मिलाया जाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मधुरा – Madhura. Another name of city Madura. दक्षिण द्रविड़ देश में वर्तमान मदुरा नगर “