आस्थान मंडप!
आस्थान मंडप Conference hall, Place of assembly. सभा मंडप।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्मलसागर (आचार्य) – Nirmalasagar (Aachaarya). Name of a saint, the disciple of Acharya Shri VimalsagarMaharaj. आचार्यश्री विमलसागर महाराज (भिण्ड) के शिष्य (ई.श. 20-21), इनकी प्रेरणा से गिरनार सिद्धक्षेत्र का विकास हुआ है”
द्रव्य ध्येय To concentrate mind on the virtuous matters. अध्यात्म वेत्ताओं के अनुसार 4 प्रकार के ध्येय पदार्थों में एक सत् या गुणपर्यायवान् पदार्थ में एकाग्र होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आहारचर्या A time limit related to Digambar Jain saint-food. श्रावक के द्वारा नवधाभक्तिपूर्वक जैन साधु को आहार के लिए आमंत्रित करने पर साधु द्वारा विधिपूर्वक उनके घर में दिन में एक बार खड़े होकर पाणि पात्र में भोजन लेना दिगम्बर जैन साधु की आहारचर्या कहलाती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्दोष – Nirdosha. Innocent, blameless. दोष रहित; समस्त पापमल कलंकरूपी कीचड़से रहित अर्थात् पवित्र “
द्रव्य अप्रत्याख्यान Lust or desire for illusive matters. रागादि विषयों की आकांक्षा रूप अप्रत्याख्यान के दो भेदों में एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्ग्रन्थलिंड़् – Nirgranthalinga. Possessionless &passionless sign, state of Digambar saint. दिगम्बर मुनि; जिनमुद्रा अर्थात् अर्हन्त मुद्रा, नीष्परिग्रह लिंग (चिन्ह) “
द्यानतराय A writer who wrote number of books on Jainism. टागरा निवासी एक लेखक ‘पंडित’ जिन्होंने धर्मविलास, पूजापाठ व भक्ति स्तोत्र आदि अनेक ग्रंथों की रचना की। समय- ई. सन् 1676-1723।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरावरण – Niraavarana. Univeiling, Uncovered. आवरण से रहित (केवल ज्ञान), मुनियों के द्वारा बिना आवरण के शयन करना कायक्लेश तप का एक लक्षण है”