परामर्ष!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Consideration, Advice. विचार-विमर्श, चिंतन करना।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवन (देव विमान) – Bhavana (Dev Vimana). Palace – a signifying figure seen by mother of Jaina Lord among 16 dreams. तीर्थकरों के गर्भ में आने पर माता द्वारा देखे गये १६ स्वप्नों में १४ वें स्वप्न का चिन्ह “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषार्थसिध्दयुपाय – Purusarthasiddhayupaya. A book written by Acharya Amritchandra. आचार्य अमृतचन्द्र (ई. ९०५-९५५) द्वारा रचित एक श्रावकाचार एवं अहिंसा की विशेष व्याख्या करने वाला संस्कृत ग्रंथ, यह श्रावक एवं साधुओं द्वारा अवश्य पठनीय है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Beneficence to other, well- being of others. दूसरो का हित करना व चाहना।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथालब्ध–Yathalabdh. Whatever available (an adjective word). जो भी उपलब्ध हो (यह एक विशेषण रूप शब्द है जो व्यापार, ज्ञान आदि में जितना उपलब्ध हो उसमें संतोष करना रूप से घटित होता है” यह साधुओ के आहार संबंधी विषय में भी घटित होता है”)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरालेख – Puralekha. Epigraphy; an archive, the study of inscriptions. शिलालेख विघा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पदमध्वज: Auspicious flags in the samavasharan-assembly of Lord, Name of predestined Kulkar (ethical founder). स्मवशरण से संबंधित कमलांकित ध्वजाएं, भविष्य कालीन 14 वें कुलकर ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्च्छन–Murchchhan. A type of birth by spontaneous generation. तीन लोको के ऊपर, नीचे और तिरछे देह का चारो ओर सेग्रहण होना अर्थात चारो ओर से पुद्गलो का ग्रहण करके अवयवो की रचना होना, इसी को संमूर्च्छन जन्म कहते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रणय – Pranaya. Love, loving entearty. ब्राह्य पदार्थों में ममत्वरूप भाव का होना ” प्रेम, स्नेह, घनिष्ठता “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निर्वाण : == जाइ—जर—मरणरहियं परमं कम्मट्ठवज्जियं सुद्धं। णाणाइचउसहावं अक्खयमविणासमच्छेयं।। —नियमसार : १७७ निर्वाण की स्थिति जन्म, जरा व मरण से रहित होती है। वह आठ कर्मों से रहित, उत्कृष्ट एवं शुद्ध है। वह अनंत दर्शन, अनंत ज्ञान, अनंत सुख व अनंत वीर्य—इन चार आत्मिक स्वभावों से युक्त है,…