पुरुषवेद सिध्द!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेद सिध्द – Purusaveda Siddha. Beings who get salvation through the form of Purushved. पुरुषवेद (द्रव्य एवं भाव) से सिध्द होने वाले जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेद सिध्द – Purusaveda Siddha. Beings who get salvation through the form of Purushved. पुरुषवेद (द्रव्य एवं भाव) से सिध्द होने वाले जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लहू – रक्त, साधु के आहार सम्बन्धी 32 अंतराय में एक अंतराय अपने व दूसरे के लहू – रूधिर निकलता देखकर भोजन छोड देना। Lahu-Blood, an obstacle (bleeding) in the food taking of saints
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरालिपि – Puralipi. Palaeography, ancient writing. पुरानी लिपि जैसे- ब्राह्मी लिपि आदि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोद्रव्यवर्गणा – Manodravyavarganaa. A type of aggregate of Karmic molecules related to forming mental faculty. 23 वर्गणाओं में एक वर्गणा ;एक जाति के पुद्गल के सूक्षम स्कंध जिनसे द्रव्य मन बनता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्वलित – Prajvalita. Blazing fire, The 6th Patel (layer) of the 3rd hell. प्रकृष्ट रूप से जलती हुई अग्नि, तीसरे नरक का छटा पटल “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्मय –Vismaya. Sentiments of astonishment, Amazement. आश्चर्य या अचम्भे की भावना; १८ दोषों में से कि अरिहंत भगवान के नहीं होता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघुशंका – मूत्रोत्सर्ग, लघु व दीर्घ षंका जाने के बाद प्रायष्चित के रूप 25 उच्छ्वास का कायोत्सर्ग किया जाता है। Laghusamka-Urination
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रइधू – पउम चरिउ, जसहर चरिउ, धण्णकुमार चरिउ, दष लक्षण धर्म, दस स्तुतियां आदि के रचियता एक अपभ्रंष कवि। समय – वि 1457 – 1536, दस लक्षण धर्म दस स्तुतियां। Raidhu-Name of an Apabhransh Jainapoet
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदपद:Different kinds of typical literary words with their antonyms. उत्कृष- अनुत्कृष, जघन्य-अजघन्य, सादि-अनादि, धु्व-अधु्व आदि समस्त भेद पद कहलातेहैं “