दीप्ति!
दीप्ति Effulgence, Lustre, Radiance. तेज, चमक, प्रभा । इक्ष्वाकुवंशी एक राजा का नाम ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दीप्ति Effulgence, Lustre, Radiance. तेज, चमक, प्रभा । इक्ष्वाकुवंशी एक राजा का नाम ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संध्या – Sandhyaa. Evening, Joining period of night-morning, morning-afternoon & evening-night (i.e. dawn, mid-joining & dusk). शाम ” प्रातः,मध्यान्ह,सायंकाल के संधिकालों को संध्या कहते हैं ” इन संधिकालों में वंदना एवं सामायिक की जाती है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुप (देव) – Svaruupa (Deva). A type of peripatetic deities of Yaksh type, Name of an Indra of some peripatetic deities of Bhoot types. यक्ष जाति के व्यंतर देवो के 12 भेदो मे 10वां भेद, भूत जातिक के व्यंतर देवो का इन्द्र।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव अनुयोगद्वार – Bhava Anuyogadvara. A kind of disquisition door (Anuyogadvar). अनुयोगद्वार का एक भेद या भाव प्ररूपणा “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विश्व – Vishva. World. संसार; ६ महाद्वीपों में उपलब्ध संसार “
एतिकायन One believing in ignorance. एक अज्ञानवादी मत को मानने वाला।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवपाल Name of the predestined 23rd Teerthankar (Jaina-Lord). भावीकालीन तेईसवें तीर्थंकर का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संतोष – Santosha. Satisfaction,Contentment. शांति, परितुष्टि ” अर्थात् लोभ-तृष्णा का अभाव “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वमुख उदय – Svamukha Udaya. Natural fruition of karmas. कर्म प्रकृतियो का आपरुप होकर ही उदय मे आना स्वमुख उदय है एवं अन्य प्रकृति रुप होकर उदय मे आना परमुख उदय हैं।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मिथ्यात्व : == मिथ्यात्वं वेदयन् जीवो विपरीतदर्शनो भवति। न च धर्म रोचते हि, मधुरं रसं यथा ज्वरित:।। —समणसुत्त : ६८ जो जीव मिथ्यात्व से ग्रस्त होता है, उसकी दृष्टि विपरीत हो जाती है। उसे धर्म भी रुचिकर नहीं लगता, जैसे ज्वरग्रस्त मनुष्य को मीठा रस भी अच्छा नहीं…