सर्वपदार्थ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वपदार्थ – Sarvapadaartha. All matters or substances. समस्त पदार्थ परोक्ष प्रमाणभूत श्रुतज्ञान के द्वारा सर्व पदार्थ जाने जाते है क्योकि लोकालोक का परिज्ञान व्याप्ति रूप से छद्मस्थों में भी पाया जाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वपदार्थ – Sarvapadaartha. All matters or substances. समस्त पदार्थ परोक्ष प्रमाणभूत श्रुतज्ञान के द्वारा सर्व पदार्थ जाने जाते है क्योकि लोकालोक का परिज्ञान व्याप्ति रूप से छद्मस्थों में भी पाया जाता है।
चैत्यप्रासाद भूमि The first land of Samavasharan (the holy assembly of Lord Arihant). सम्वशरण की प्रथम भूमि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वज्ञदेव – Sarvagyadeva. Omniscience (Lord Arihant, Siddha). केवली आप्; जो त्रिकालवर्ती गुण पर्यायो से संयुक्त समस्त लोक और अलोक को प्रत्यक्ष जानते है वह सर्वज्ञदेव है अर्थात् अर्हत व सिद्व।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नि – क्षेत्र का प्रमाण विषेश। एक हाथ का परिमाण 2 वितस्ति=1 हाथ। इसका मूल नाम अरत्नि है। Ratni- A measurement unit of area
चूर्णिका Pounded rice or grain. भेद का एक प्रकार ; उड़द मूंग आदि का जो खंड किया जाता ह.ई , वह चूर्णिका है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सरीसृप – Sareesripa. A reptile, crawing beings. पानी मे रहने वाला एक प्रकार का सर्पः एक तिर्यच जीव। इसकी उत्कृष आयु 9 पूर्वाग की है एवं जघन्य आयु अन्तर्मुहूर्त की है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग – मन, वचन काय के निमित्त से होने वाली आत्मप्रदेषो के परिस्पन्दन की क्रिया। Yoga-Vibration in the soul points (caused by mind Speech & body)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सयोगकेवली – Sayogakevalee. An omniscient possessing physical presence. सशरीरी परमात्मा। 13 वें गुणस्थान मे अरहंत परमात्मा जो अनंत चतुष्टय सहित परमौदारिक देह सहित है, जिनका उपदेष व विहार होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग संक्रान्ति – योग सक्रान्ति प्रथम षुक्लध्यान में मन वचन काय योगो का पलटना। Yoga Samkramti- Transition of all activities (related to mind speech & body) in auspicious & sacred mode