पा़त्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पा़त्र :Worthy donees (spiritually pure one), utensils.दान के लिए पात्र (मोक्षमार्ग के पथिक) जो उत्तम, मघ्यम, जधन्य के भेद से तीन प्रकार के होते है। बरतन।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पा़त्र :Worthy donees (spiritually pure one), utensils.दान के लिए पात्र (मोक्षमार्ग के पथिक) जो उत्तम, मघ्यम, जधन्य के भेद से तीन प्रकार के होते है। बरतन।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भंगविधि – Bhamgavidhi. A particular method for obtaining knowledge of something, synonym word for shrutgvan (scrip- tural knowledge). अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शील आदि भंग का जिसके द्वारा विधान किया जाता है उसे भंगविधि अर्थात् श्रुतज्ञान कहते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शौच : == समसंतोसजलेणं जो धोवदि तिव्व—लोहमल—पुंजं। भोयण—गिद्धि—विहीणो, तस्स सउच्चं हवे विमलं।। —समणसुत्त : १०० समता और संतोष के जल से जो तीव्र लोभ के मल—पुंज को धाया करता है, भोजन की लालसा से जो विहीन हुआ करता है, वह पवित्र शौच धर्म से संपन्न होता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भदंत – Bhadamta. Respectful word for addressing great ascetics. जो सब कल्याणों को प्राप्त हों वह भदन्त हैं , साधु का अपरनाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Supreme, Highest state which is originated after the destruction of all Karmas. उत्कृष्ट, समस्त कर्मों का नाश होने पर अपने स्वभाव से जो उत्पन्न है उसे परा कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यज्ञमित्र–Yagyamitr. Name of the 50th chief disciple of Lord Rishabhdev. तीर्थंकर वृषभदेव के 50वे गणधर का नाम”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांडुकनिधि:One of the 9 treasures of chakravrti (emperor).चक्रवर्ती की 9 निधियोे मे एक निधि, धान्य को देने वाली।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मनंदि: Name of the disciple of Acharya Shri Kunthusagar Maharaj and many other Digamber Jain Acharyas. आचार्यश्री कुंथुसागर जी महाराज के एक प्रसिद्ध षिष्य ( ई0 श0 20-21) । इस नाम से दिगम्बर जैन आम्नाय में अनेको आचर्य हुए है। आचार्य कुंदकुद स्वामी को भी पदमनंदि नाम से जाना जाता है।