स्थूल चोरी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थूल चोरी – Sthuula Cori. Stealing to take something without permission.किसी की रखी हुई, भूली हुई या गिरी हुई वस्तु को लेना स्थूल चोरी है, श्रावक इसका त्यागी होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थूल चोरी – Sthuula Cori. Stealing to take something without permission.किसी की रखी हुई, भूली हुई या गिरी हुई वस्तु को लेना स्थूल चोरी है, श्रावक इसका त्यागी होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघीयस्त्रय वृत्ति – आचार्य अभयचंद्र की लघीयस्त्रय ग्रंथ पर स्याद्रादभूशण नाम की तात्पर्य व्त्ति। Laghiyastrayavrtti- name of a commentary written by Acharya Abhayachandra
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शिक्षा :== विपत्तिरविनीतस्य, संपत्तिर्विनीतस्य च। यस्यैतद् द्विधा ज्ञातं, शिक्षां स: अधिगच्छति।। —समणसुत्त : १७० अविनयी के ज्ञान आदि गुण नष्ट हो जाते हैं, यह उनकी विपत्ति है और विनयी को ज्ञान आदि गुणों की सम्प्राप्ति होती है (यह उसकी सम्पत्ति है)। इन दोनों बातों को जानने वाला ही…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिति बंध स्थान – Sthiti Bamdha Sthaana. Position of thoughts causing karmic binding.जिन परिणामो के द्वारा स्थितियाॅ बांधी जाती है उन परिणामो का नाम स्थिति बंध है, उनके स्थानो को (अवस्था विेषेषो को) स्थिति बन्ध स्थान कहते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरोधी धर्म – Virodhi Dharma. Antagonism, Objective, Opposite nature (like cool-hot ect.). जीवादि पदार्थों में ठंडा – गर्म, नित्य –अनित्य, एक – अनेक, भेद- अभेद आदि अनेक विरोधी गुण “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृत्यु आशंका –Mratyu Aashanka. To wish for early death to severe pain (an infraction of holy death of a saint). मरणाशंसा– यह सल्लेखनाव्रत का दूसरा अतिचार है” पीड़ा से व्याकुल होकर शीघ्र मरने की इच्छा करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थापना सत्य – Sthaapanaa Satya. Ritual installation of lord arihant in artifical in artifical idols.जो अर्हन्त आदि पंच परमेष्ठी की पाषाण या धातु आदि की प्रतिमा मे स्थापना की जाती है वह स्थापना सत्य है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संहनन नामकर्म – Sanhanana Naamakarma. Physique making Karmic nature causing joints of bones in the body (of 6 kinds- strong, weak etc.). जिस कर्म के उदय से हड्डियों का बंधन विशेष होता है ” वज्रऋषभनाराच, वज्रनाराच, नाराच, अर्धनाराच, कीलक और असंप्राप्तसृपाटिका ये संहनन के 6 भेद हैं “
चरम Ultimate, final, A king of Hari descendant. अंतिम, हरिवंश का एक राजा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिभुवनचंद्र An Acharya of Kashtha sangh. काष्ठा संघ के एक आचार्य । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]