उपमान-उपमेय संबंध!
उपमान-उपमेय संबंध Mutual relation between the objects of compa-rison. वह संबंध जिससे किसी की तुलना की जाये वह उपमान एंव जो तुलना करने करने के योग्य हो वह उपमेय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपमान-उपमेय संबंध Mutual relation between the objects of compa-rison. वह संबंध जिससे किसी की तुलना की जाये वह उपमान एंव जो तुलना करने करने के योग्य हो वह उपमेय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांपरायिक – Saamparaayika. Mundane inflow, passionful influx. कषाय सहित अर्थात् जो कर्म संसार का प्रयोजक है वह साम्परायिक है।
उपनिषद भाष्य A book written by ‘Sureshvarji’. वेदान्त साहित्य प्रवर्तक शंकर के शिष्य सुरेश्वर (ई.820) कृत एक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
==चोरी== बिना दिये किसी की गिरी, पड़ी, रखी या भूली हुई वस्तु को ग्रहण करना अथवा उठाकर किसी को दे देना चोरी है। इस पाप के करने वाले चोर कहलाते हैं। अथवा Theft, Robbery, Stealth, Concealment. चोरी-रखे हुए , गिरे हुए , भूले हुए अथवा धरोहर रखे हुए परद्रव्य को हरना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]] धर्मात्मा सुरेन्द्रदत्त सेठ…
उपचरित सद्भूत व्यवहासर नय A type of figurative conception/perception. उपाधि सहित गुण व गुणी में भेद को विषय करने वाला नय जैसे जीव के मतिज्ञान आदि गुण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठापन समिति- 5 समितियों में एक समिति; निर्जतुभूमि पर मल मूत्रादि का विसर्जन करना। pratisthapana samiti – carefulness in excertion of faces etc. body wastes (waste disposal)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदोष- ज्ञानावरण दर्षनावरण के आस्त्रव का कारण एक भाव; मन में द्वेश भाव का होना। pradosa – illusive or maliceful mentality
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन मातृका – 5 समिति और ३ गुप्ती ऑफ़ प्रवचन मातृका कहते है ” Pravacanamatrka- Conduct with carefulness and self control
उपचारकथन Formal statement. व्यवहार कथन- ‘कर्म जीव के स्वभाव का पराभव करता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदक्षिणा- वन्दना करते समय गुरु, जिन और जिनग्रह की परिक्रमा करना। pradaksina – circumambulation, salutary circling.