संरक्षणानंद!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संरक्षणानंद – Sanraksanaananda. To worry for prosperity. रौद्रध्यान का एक भेद; धन के उपार्जन एवं संरक्षण आदि का चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संरक्षणानंद – Sanraksanaananda. To worry for prosperity. रौद्रध्यान का एक भेद; धन के उपार्जन एवं संरक्षण आदि का चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वजय – Sarvajaya. Name of the son of Vidyadhar Vinami. विद्याधर विनमि का पुत्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सरस्वती – Sarasvatee. Goddess of learning, Resonant preaching of Tirthankars (Jaina-Lords), mother’s name of the 11th Jaina-Lord of Videh (region), the female beloved divinity of an Indra in peripatetic deities of Gandharva type. विद्या की देवी, द्वादशांग जिनवाणी के प्रतीक रुप मे देवी के आकार की सरस्वती की मूर्ति जैन आगम मे मान्य है।…
दशकरण चूलिका A part or lesson of ‘Gommatsar-Karmakanda’ treatise. गोम्मटसार – कर्मकांड ग्रंथ का एक अध्याय , इसमें 10 कारणों का स्वरूप है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चालिसिय A type of conduct deluding Karmas. चारित्र मोहनीय ; ४० कोटाकोटी स्थिति वाले बंध चालिसिय कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिभुवनस्वयंभू Son of the poet Svayambhu. कवि स्वयंभू के पुत्र जिसने वृहत्सर्वज्ञसिद्धि की रचना की । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संमूर्च्छन जन्म – Sammoorchchhana Janma. Spontaneous birth (formation of body organs or limbs by surrounding matter). जन्म के तीन भेदों में एक भेद; तीन लोकों में सर्वत्र बिना माता-पिता के सम्बंध से सब ओर से पुद्गलों को ग्रहण करके जो शरीर की रचना हो जाती है उसे संमूर्च्छन जन्म कहते हैं ” देखें- संमूर्च्छन…
छन्दोबिंदु A prosody written by Nagvarm. नामवर्ग (ई. सन् ९९०) द्वारा रचित एक छंदशास्त्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]