वर्द्धमानचारित्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमानचारित्र – Varddhamaana Chaaritra.: Name of a great treatise (epic) written by a great poet Asag. शक सं. 910 के महाकवि अगस द्वारा लिखित 18 सर्ग प्रमाण हिन्दी महाकाव्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमानचारित्र – Varddhamaana Chaaritra.: Name of a great treatise (epic) written by a great poet Asag. शक सं. 910 के महाकवि अगस द्वारा लिखित 18 सर्ग प्रमाण हिन्दी महाकाव्य “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भागाभाग – Bhagabhaga. Divided divisions. कुल द्रव्यों का भाग करने पर, कितना भाग किसके हिस्से में आता है, इसे भागाभाग कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषमधारा – Vishamadhara. Sequence of odd numbers. १४ धाराओं में एक धारा; १ से लगाकर केवलज्ञान के अंशों तक विषम संख्या की पंक्ति ” जैसे – १, ३, ७ आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुर्यप्रज्ञप्ति – Suryapragyaapti. A part of scriptural knowledge containin description about the Sun (reg. its age, movement, family etc.) अंगश्रुत का एक भेद । दृष्टिवाद के प्रथम भेद परिकर्म में 5 प्रज्ञप्तियों का वर्णन है, उसमे यह दूसरी प्रज्ञप्ति है। इसमें 5 लाख 3 हजार पदो के द्वारा सूर्य की आयु, परिवार, वैभव, गति…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अनुमानावयव – Pancha Anumaanaavayava. Five elements of apprehensive sentences. प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहारण, उपनय और निगमन ये अनुमान वाक्य के पंच अवयव है “
देवमूढता Believing in false deities. मिथ्यादेवों की आराधना करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूरकीर्ति – Soorakeertee. Name of Bhattarak of Nandi group. न्ंदिसंघ बलात्कारगण वारां गद्दी के एक भट्टारक भावनंदि के शिष्य , विद्याचन्द्र के गुरू । समय वि0सं0 1167 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंकप्रभा – Pankaprabhaa. That (4th) earth which has the colour of clay or mud. चतुर्थ नरक भूमि; जिसकी प्रभा कीचड़ के समान है “
चक्षुदर्शनावरण Obscurring Karma of visionary conation. दर्शानावरण कर्म के ९ भेदों में से एक भेद; जो कतमा चक्षु के द्वारा वस्तु का सामान्य ग्रहण नन होने दे ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाजनांग जातीय कल्पवृक्ष – Bhajanamga Jatiya Kalpavrksa. A type of wish fulfilling trees (providing uten-sils). भोगभूमि में पाये जाने वाले १० कल्पवृक्षों में एक, यह कल्पवृक्ष सुवर्ण एंव बहुत से रत्नों से निमित धवल झारी, कलश, गागर आदि बर्तन प्रदान करने वाला होता है “