बन्ध (पुण्य-पाप)!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बन्ध (पुण्य-पाप)- पुण्य एवं पाप कर्मो का बंध होना। Bandha (punya- papa)- Binding of karmas- meritorious & demeritorious
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बन्ध (पुण्य-पाप)- पुण्य एवं पाप कर्मो का बंध होना। Bandha (punya- papa)- Binding of karmas- meritorious & demeritorious
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवेदनी कथा – Sanvedanee Kathaa. Tale creating religious sentiments. पुण्य के फल का कथन करने वाली अर्थात् धर्मानुराग बढ़ाने वाली कथा “
भद्रबाह- ये पाँचवे श्रुतकेवली थे। 12 वर्ष के दुर्भिक्ष के कारण इनको उज्जैनी छोड़कर दक्षिण की ओर प्रस्थान करना पड़ा था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य भी उस समय उनसे दीक्षा लेकर साथ ही दक्षिण देश को चले गये थे। श्रवण बेलगोल में चन्द्रगिरी पर्वत पर दोनों की समाधि हुयी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बध्यमान कर्म- मिथ्यात्वादि प्रत्ययों द्वारा कर्म रुप प्राप्त होने वाला कार्मण स्कंध बध्यमायन कहलाता है। Badhyamana Karma- A karmic aggregate bound with delusions
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रघुनाथ – न्यायदर्षन में नव्यन्याय के प्रसिद्ध प्रणेता, श्रीरामचन्द्र जी का अपरनाम। Raghunatha-Name of a great judiciary founder, Another name of Shri Ram
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपगताचूलिका – द्वादषांग श्रुतज्ञान के दृश्टिवाद अंग के 5 भेदो मे चूलिका कर एक उपभेद।जिसमें सिंह आदि आकृति धारण करने के मंत्र – तंत्र का वर्णन है। Rupagataculika-A type of scriptural knowledge (Shrutgyan) containing description of mystical theory
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादर कायिक जीव- एकेन्द्रिय जीवों का एक भेद; जो स्वयं दूसरों से रुकता है तभा दूसरों को रोकता है। Badara Kayika Jiva- Gross-bodied beaings
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यमनोयोग – Satyamanoyoga. Vibration in soul points for having right knowledge. मनोयोग के 4 भेदों में एक भेद ” यथार्थ पदार्थों के ज्ञान उत्पन्न करने की शक्ति के लिए भाव मन की चेष्टा रूप योग से आत्मप्रदेशों का सकम्प होना सत्य मनोयोग है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रष्ठक – सौधर्म स्वर्ग का एक पटल। Prasthaka- Name of a patal (layer) of saudharma heaven
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निपिबद्ध – लिखा हुुआ द्रव्यश्रुत जो 64 अक्षरो एवं पदो के द्वारा लिखा जाता है। Lipibaddha-Something put in writing form