स्वेच्छारी!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वेच्छारी – Svecchaacaarii. One free from any restraints, willful, wayward. अपनी इच्छा से आचरण करने वाला।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वेच्छारी – Svecchaacaarii. One free from any restraints, willful, wayward. अपनी इच्छा से आचरण करने वाला।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परजुगुप्सा कथा:Contemptuous talk.दूसरों के प्रति ग्लानि व अरूचि उत्पन्न कराने वाली कथा ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रिक पूजा – त्रैकालिक पूजा का एक प्रकार अर्थात रात्रि में पूजा करना। सागार धर्मामृत ग्रंथों में श्रावको के लिए तीनों संध्याओं में पूजन करने का विधान है। Ratrika Puja-A kind of Traikalik worshiping, worshiping the lord in night time
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाभाविक आनंद – Svaabhaavika Aanamda. Supreme natural bliss, supreme pleasure. निश्चत मोक्षमार्ग के अनेक नामो मे एक नाम, समस्त विकल्पो से रहित परम समाधि से उत्पन्न होने वाला सुख।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साक्षर शब्द – Sakshara Sabda. Syllabary language. मनुष्यों की भाषा साक्षरी तथा पशु-पक्षियो की निरक्षरी होती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांतर बंधी प्रकृति – Saantara Bandhee Prakrti. A karmic nature with having property of its anhihilation (to put out of existence of one Gati for another). जिस कर्म प्रकृति का काल के क्षय से बन्ध व्युच्छेद संभव है वह सांतरबंधी प्रकृति है। अर्थात् जहां किसी समय देवगति का बंध हो और किसी समय अन्य…
देवमरण A part of first forest Bhadrashal of Sumeru mountain. सुमेरू पर्वत के प्रथम वन भद्रशाल का एक भाग। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिषेधरुप हेतु- हेतु का एक भेद; इस स्थान पर षीत नहीं है क्योंकि उश्णता मौजूद है, इस प्राणी में सुख नही है क्योंकि सुख से विरुद्ध दुःख मौजूद है, इत्यादि। pratisedharupa hetu – a cause pertaining to negative sense
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेश परिस्पंद- आत्म प्रदेषें में योगों के माध्यम से हलन चलन होना। pradesa parispamda – vibration in soul spaces
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन- श्रुतज्ञान का अपरनाम, जिनवाणी, प्रकृश्ट वचन, पिषाच व्यंतरों का 14 वां भेद। Pravacana- sermons, preachings, exposition, a type of peripatetic deities