द्रव्य निमित्तक!
द्रव्य निमित्तक Circumstantial transformation of matters. द्रव्य कर्म का निमित्त पाकर क्रोधादि कषायरूप परिणमन होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य निमित्तक Circumstantial transformation of matters. द्रव्य कर्म का निमित्त पाकर क्रोधादि कषायरूप परिणमन होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य उपक्रम A type of Upakram – a pursuance in accordance with natural matters. उपक्रम का एक भेद (उपक्रम- जो प्रकृत प्रदत्त पदार्थ के अर्थ को अपने समीप करता है)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदग्रहण :Comprehension of something with its different dimensions. ज्ञान में वस्तु को भेद या विकल्प सहित गृहण करना “
द्रविक A liquid substance or melted substance. पतला, तरल पदार्थ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपरीत मिथ्यात्व – Viparita. Mithyatva. Belief in wrong theory or wrong religious con-ception. मिथ्यात्व के ५ भेदों में भेद; विपरीत धर्म को यथार्थ मानना ” जैसे – पशु यज्ञ से स्वर्ण मिलेगा, परिग्रह सहित भी निग्रर्थ होता है इत्यादि “
दोग्रंथिक पाहुड Supreme treatise (commandments) containing knowledge of all 12 Angas. जिन भगवान के द्वारा निर्दोष श्रेष्ठ विद्धान आचार्यों की परम्परा से भव्य जनों के लिए भेजे गये बारह अंगों के वचनों का समुदाय अथवा उनका एकदेषपरमानंद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतोत्तम – Bhutottama. A type of peripatetic deities. भूत जाति के व्यंन्तर देवों के सात भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्र्बल – Bhadrabala. Name of a chief disciple of Lord Adinath. आदिनाथ भगवान् के १९ वें गणधर का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथकत्व विक्रिया – Prthaktva Vikriya. Miraculous activity of making different forms of body at different places at time while original body remaining at original place. अपने मूल शरीर से भिन्न – भिन्न अनेक शरीर बनाकर उनमें अपने आत्मा के प्रदेशों को फैलाना ” जैसे – सौंधर्म इंद्र अपने मूल शरीर को सौधर्म…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावशक्ति – Bhavasakti. Power of thinking. जीव की एक शक्ति; वर्तमान अवस्था (पर्याय) सहितरूप भाव शक्ति है “