चतुर्दश महारत्न!
चतुर्दश महारत्न Fourteen jewels of Chakravarti (emperor). चक्रवर्ती के १४ रत्न ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्दश महारत्न Fourteen jewels of Chakravarti (emperor). चक्रवर्ती के १४ रत्न ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्मत्तगुणविहाण कव्व – Sammattagunavihaana Kavvya. Name of a book written in Apabhransh language by Shubhkirti. शुभकीर्ति द्वारा (ई. 1442) रचित अप्रभंष भाषाबद्व काव्य।
उदयादि अवस्थित गुणश्रेणी आयाम A kind of stable geometric progression length related to Karmic destruction. परिणामों की विशुद्धि की वृद्धि से अपवर्तनाकरण के द्वारा उपरितन स्थिति से हीन करके अन्तर्मुहूर्त काल तक प्रतिसमय उत्तरोत्तर असंख्यातगुणित वृद्धि के क्रमसे कर्म प्रदेशों की निर्जरा के लिये जो रचना होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समुत्पत्तिक कषाय – Samutpattika Kashaaya. Something passion generating. जो जीव से भिन्न होकर कषाय को उत्पन्न करता है वह समुत्पत्ति कषाय है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संवर : == सर्वभूतात्मभूतस्य, सम्यक् भूतानि पश्यत:। पिहितास्रवस्य दान्तस्य, पापं कर्म न बध्यते।। —समणसुत्त : ६०७ जो समस्त प्राणियों को आत्मवत् देखता है और जिसने कर्मास्रव के सारे द्वार बंद कर दिए हैं उस संयमी को पापकर्म का बंध नहीं होता। तपसा चैव न मोक्ष:, संवरहीनस्य भवति जिनवचने।…
चक्रवान् A city in the south of Vijayardh mountain. विजयार्ध पर्वत की दक्षिण श्रेणी का एक नगर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चित्रभवन Name of the residence and the cave of Kuber in Nandanvan (a forest) of ‘Sumeru’ mountain. सुमेरू पर्वत के नंदन आदि वनों में स्थित कुवर का भवन व गुफा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवातिैक – आचार्य अकलंक देव द्वारा तत्वार्थसूत्र गं्रथ पर की गई विस्तृत संस्कृत वृत्ति। Rajavartika-name of a treatise written by Acharya Akalank dev