प्रमत्तयोग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमत्तयोग- कशाय सहित मन वचन काय की प्रवित्ति। Pramattayoga- Vibration due to passions, which agitate mind, body or speech
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमत्तयोग- कशाय सहित मन वचन काय की प्रवित्ति। Pramattayoga- Vibration due to passions, which agitate mind, body or speech
द्रव्य पाप Sinful nature of Karmas (substantive sin). कर्म की पाप रूप 100 प्रकृतियां ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभाकर भट्ट- आचार्य योगेन्दुदेव के षिश्य एक दिगम्बर साधु, जिनको सम्बोधित करते हुए इन्होने “परमात्मा प्रकाष” ग्रंथ की रचना की है। Prabhakarabhatta- A Digambar Jain saint, disciple of Yogendudeva Acharya
द्रव्य ध्येय To concentrate mind on the virtuous matters. अध्यात्म वेत्ताओं के अनुसार 4 प्रकार के ध्येय पदार्थों में एक सत् या गुणपर्यायवान् पदार्थ में एकाग्र होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहसा निक्षेप – Sahasaa Nikshepa. Sudden installation of something due to some fear etc. निक्षेपाधिकरण के 4 भेदों में एक भेद । यकायक किसी भय से या किसी अन्य कार्य करने की शीघ्रता से वस्तु को रख देना । यह अजीवाधिकरण आस्रव का एक कारण है।
द्रव्य अप्रत्याख्यान Lust or desire for illusive matters. रागादि विषयों की आकांक्षा रूप अप्रत्याख्यान के दो भेदों में एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोग्य लब्धि- सम्यग्दर्षन की प्राप्ति में आधारभूत 5 उब्धियों में से चतुर्थ लब्धि, सर्व कर्मो की उत्कृश्ट स्थिति और उत्कृश्ट उनुभाग को घात करके अंतःकोड़ाकोडी स्थिति और द्विस्थानीय अनुभाग में स्थित कर देना। PrayogyaLabdhi- A type of attainment (Labdhi) before getting Samyakdarshan, experimental competency attainment
द्यानतराय A writer who wrote number of books on Jainism. टागरा निवासी एक लेखक ‘पंडित’ जिन्होंने धर्मविलास, पूजापाठ व भक्ति स्तोत्र आदि अनेक ग्रंथों की रचना की। समय- ई. सन् 1676-1723।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ऊर्ध्वगुरूत्व Upward attractive force. किसी चीज को ऊपर की तरफ ले जाने की सामर्थ्य उर्ध्वगुरूत्व है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]