युगादि पुरूश!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगादि पुरूश – कुलकर, युग के आदि में होने से इन्हेही युगादि पुरूश कहते है ये मुख्यत 14 होते है। Yugadi Purusa-The great personalities (Kulkars) in the beginning of the era
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगादि पुरूश – कुलकर, युग के आदि में होने से इन्हेही युगादि पुरूश कहते है ये मुख्यत 14 होते है। Yugadi Purusa-The great personalities (Kulkars) in the beginning of the era
जयचंद छाबड़ा A great personality who wrote commentaries on many books like ‘Prameyratnamala’ etc. एक विद वान जिन्होंने सर्वार्थसिद्धि (वि. १८६१) , प्रमेयरत्नमाला (वि. १८६३) , द्रव्य संग्रह (वि. १८६३) आदि ग्रंथों पर वचनिकाएं लिखीं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वच्छंद श्रोता – Svacchammda Ssrotaa. Unworthy or restraintless listeners.कुपात्र श्रोता। स्वच्छंद श्रोताओ को विधा देना संसार और भय को ही बढ़ाने वाला है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == लोभी : == सुवर्णरूप्यस्स च पर्वता भवेयु:, स्यात् खलु कैलाससमा असंख्यका:। नरस्य लुब्धस्य न तै: किंचित्, इच्छा खलु आकाशसमा अनन्तिका।। —समणसुत्त : ९८ कदाचित् सोने और चाँदी के कैलास के समान असंख्य पर्वत हो जाएं, तो भी लोभी पुरुष को उनसे तृप्ति नहीं होती, क्योंकि इच्छा आकाश के…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेहेसरचरीउ–Mehesrachriu. Name of a book. सुलोचनाचारित्र विषयक अपभ्रंश भाषा का एक ग्रंथ”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याद्वादसिद्वि – Syaadvaadasiddhi. Name of a treatise written by Acharya Vadibhisingh. आचार्य वादीभसिह (ई0 1103) द्वारा रचित संस्कृत भाषाबद्व न्याय विषयक ग्रन्थ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लता – 84 लाख लतांग प्रमाण काल धातिया कर्म की अनुभाग षक्ति का एक उदाहरण। Lata- A large unit of time
जन्मरहितता Immortality, a virtue of Siddhas (super beings). सिद्धों का एक गुण जो आयुकर्म नष्ट होने पर प्रगट होता है -अवगाहनत्व या जन्म-,अरण रहितता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादमूर्त – Syaadamuurta. Non-physical nature (in some aspect).परमभाव ग्राहक द्रव्यार्थिक नय की अपेक्षा पुद्गल के अतिरिक्त जीव, धर्म, अधर्म, आकाश और काल द्रव्य कथंचित् अमूर्तस्वभाव वाले है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्माद्वैत – Brahmadvaita. Name of a doctrine (related to monotheism). एक अद्वैतवाद मत ” ब्रम्ह को ही पारमार्थिक सत् मानने वाला “