भावानंत!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावानंत – Bhavanamta. A kind of infinity. अनंत का एक भेद; यह आगम और नोआगम की अपेक्षा दो प्रकार का है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावानंत – Bhavanamta. A kind of infinity. अनंत का एक भेद; यह आगम और नोआगम की अपेक्षा दो प्रकार का है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसुमित्र – Vasumitra.: Name of the 36th chief disciple of Lord Rishabhdev,Name of the chieftain of Shak dynasty. तीर्थंकर ऋषभदेव के 36वें गणधर “मगध देश की राज्य वंशावली अनुसार यह शक जाति का सरदार था ,अपरनाम बलमित्र अग्रिमित्र का समकालीन था ,समय –वी. नि. 285-345 “
उभयोदयबंधी प्रकृति Numerous space points in bilateral extremes . जो कर्म प्रकृति अपना उदय होने अथवा न होने पर भी बंधती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तिलोयपण्णत्ति A book written by Acharya Yativrishabh. आचार्ययतिवृषभ (ई. 143- 173)द्वारा रचित करणानुयोग का प्राकृत गाथाबद्ध अति प्राचीन प्रामाणिक ग्रंथ , जिसमें तहन लोक का विस्तृत वर्णन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसंत – Vasanta. : Another name of Sumeru mountain. सुमेरुपर्वत का अपरनाम “
तिर्यक् द्विक A dyad related to subhuman beings (Tiryanch). तिर्यच गति व आनुपूर्वी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्षलक्ष – Varshalaksha.: A time period of 1 lac years. काल का प्रमाण; वर्षशतसहस्त्र (एक लाख वर्ष ) “
तिर्यांच The beings other than human, celestial & infernal beings. मनुष्य , देव और नारकी जीवों को छोड़कर शेष एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय तक के जीव तिर्यंच कहलाते हैं। मन वचन काय की कुटिलता को प्राप्त, निकृष्ट अज्ञानी और जिनके अत्यधिक पाप की बहुलता पायी जाये, उसको तिर्यंच कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्तना – Vartanaa.: Continuous inperceptible minute changes in any matter. द्रव्य के प्रति समय होने वाले परिवर्तन अर्थात प्रत्येक द्रव्य प्रत्येक पर्यायमें प्रति समय जो स्वसत्ता की अनुभूति करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचकल्याणक वंदना – Panchakalyaanaka Vandanaa. Devotional celebration of five auspicious events of the life of Tirthankars (Jaina Lord). कृतिकर्म; भगवान के गर्भ, जन्म आदि पांचों कल्याणक की सिद्ध आदि भक्ति पाठ के साथ वन्दना करना “