द्रव्य पुरूष!
द्रव्य पुरूष Male by gender. पुरूषवेद निर्माण व अंगोपांग नामकर्म के उदय से शरीर में पुरूष के चिन्ह बनना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य पुरूष Male by gender. पुरूषवेद निर्माण व अंगोपांग नामकर्म के उदय से शरीर में पुरूष के चिन्ह बनना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूल प्रायश्चित–Mula Prayshchit. A special punishment for a saint –Re-initiation. किसी दोष विशेष से युक्त साधु को पुनः दीक्षा देना मूल प्रायश्चित कहलाता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सविपाक निर्जरा – Savipaaka Nirjaraa. Shedding off or dissociation of Karmas on maturity. निर्जरा के दो भेदों में एक भेद, कर्मो का अपने समय पर उदय में आकर झडना ।
द्रव्य नमस्कार Physical reverential greeting. वचन और काय से किया गया नमस्कार द्रव्य नमस्कार है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विसपर्ण –Visarpana. Expansion, Crawling, Slight expansion of soul-points. फैलाव, प्रसारण, विस्तार, रेंगना, सरकाना, दीपक के प्रकाश के समान जीव के प्रदेशों का संकोच-विस्तार (विसपर्ण) होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वोपशम – Sarvopashama. Super subsidence (of Kamas). मिथ्यत्व आदि तीनो प्रकृतियों के उदयाभाव को सर्वोपशम कहते है। प्रथमोपशम सम्यक्त्व का लाभ भी सर्वोपशम से होता है।
द्रव्य आचार्य A preceptor. पंचाचार का पालन जो स्वयं करें एंव दूसरों को भी करायें।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वस्थिति – Sarvasthiti. Karmic aggregate at highest state. उत्कृष्ट स्थिति में रहने वाले (बद्धक्रम के ) सम्पूर्ण निषेकों का जो समू है वह सव्रस्थिति है।
छहढाला A book written by Pandit Daulatram – II. पं दौलतराम – II (ई. सन् १७९८-१८६६) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]