वैश्य!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैश्य –Vaisya The third classification of Indo – Aryan Society a trader or an agriculturist etc. ४ वर्णों में एक वर्ण; जो कृषि व्यापार तथा पशुपालन आदि के द्वारा आजीविका करते हैं वे वैश्य कहलाते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैश्य –Vaisya The third classification of Indo – Aryan Society a trader or an agriculturist etc. ४ वर्णों में एक वर्ण; जो कृषि व्यापार तथा पशुपालन आदि के द्वारा आजीविका करते हैं वे वैश्य कहलाते हैं “
आहारक शरीर A kind of Karmic molecules causing body formation. छठे गुणस्थानवर्ती प्रमत्त संयत साधु सूक्ष्म तत्व के विषय में जिज्ञासा होने पर जिस शरीर के द्वारा केवली भगवान के पास जाकर जिज्ञासा का समाधान करते हैं उसे आहारक शरीर कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य शास्त्र – Bahya Sastra. All the external branches of knowledge like eco- nomics, astrology etc. non – spiritual branches. ज्योतिज्ञ्रान, छन्दशास्त्र, अर्थशास्त्र, वैधक शास्त्र, लौकिक शास्त्र, मंत्रवाद आदि शास्त्रों को बाह्यशास्त्र कहते हैं
तपभावना To practice austerity or penance. अनशन आदि बाहर प्रकार के निर्मल तप को करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्बाध – Nirbaadha. Uncontradicted, Unrestricted. बाधा रहित “
आस्रवानुप्रेक्षा Contemplation of soul (as it is free from influx of all Karmas). निरन्तर आत्मा को द्रव्यरूप और भावरूप दोनों प्रकार के आस्रवों से रहित चिन्तवन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्जल व्रत – Nirjala Varta. A vow (fasting) even without taking water. उपवास; जल का भी त्याग कर उपवास रखना ” हर व्रत को करने में उत्कृष्ट विधि निर्जल व्रत (उपवास) की होती है”