परहित!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Beneficence to other, well- being of others. दूसरो का हित करना व चाहना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Beneficence to other, well- being of others. दूसरो का हित करना व चाहना।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथालब्ध–Yathalabdh. Whatever available (an adjective word). जो भी उपलब्ध हो (यह एक विशेषण रूप शब्द है जो व्यापार, ज्ञान आदि में जितना उपलब्ध हो उसमें संतोष करना रूप से घटित होता है” यह साधुओ के आहार संबंधी विषय में भी घटित होता है”)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विप्राणस मरण – Vipranasa Marana. A kind of holy death (with abandoning meals in the obstructing period of religious observances). १७ प्रकार के मरण के भेदों में एक भेद; यह मरण उसके होता है जो अपने व्रत क्रिया चारित्र में उपसर्ग आने पर ष भी नहीं सकता और भ्रष्ट होने के भय…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोत्वचा – Notvachaa. Upper skin of bark. वृक्ष या स्कन्धोंकी छाल को त्वचा तथा उसके ऊपर जो पपड़ी का समूह होता है उसे नोत्वचा कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पदमध्वज: Auspicious flags in the samavasharan-assembly of Lord, Name of predestined Kulkar (ethical founder). स्मवशरण से संबंधित कमलांकित ध्वजाएं, भविष्य कालीन 14 वें कुलकर ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्च्छन–Murchchhan. A type of birth by spontaneous generation. तीन लोको के ऊपर, नीचे और तिरछे देह का चारो ओर सेग्रहण होना अर्थात चारो ओर से पुद्गलो का ग्रहण करके अवयवो की रचना होना, इसी को संमूर्च्छन जन्म कहते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीलव्रत – Sheelavrata. A particular vow (fasting) to be observed with particular procedure. वैशाख शुक्ला 6 के दिन (भगवान अभिनंदन का मोक्ष कल्याणक दिवस) 5 वर्ष पर्यत उपवास करना एवं ‘ओं हीं अभिनंदनजिनाय नमः’ का त्रिकाल जाप करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोकर्म आहार – Nokarma Aahaara. Intake of Nokarma Varganas cousing formation of gross body. शरीर निर्माण के निमित्तभूत नोकर्म वर्गंणाओ का आना ‘नोकर्म आहार कहलाता है ” यह समस्त सांसारिक प्राणियों के तो होता ही है तथा केवली भगवान के भी पर्मौदारिक शरीर के निमित्त से नोकर्माहार मन गया है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निर्वाण : == जाइ—जर—मरणरहियं परमं कम्मट्ठवज्जियं सुद्धं। णाणाइचउसहावं अक्खयमविणासमच्छेयं।। —नियमसार : १७७ निर्वाण की स्थिति जन्म, जरा व मरण से रहित होती है। वह आठ कर्मों से रहित, उत्कृष्ट एवं शुद्ध है। वह अनंत दर्शन, अनंत ज्ञान, अनंत सुख व अनंत वीर्य—इन चार आत्मिक स्वभावों से युक्त है,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रार्गल –Vajraargal: Name of the 13th city of southern Vijayardh mountain. विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी का 13वां नगर “