यमदंड!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमदंड–Yamdand. Name of a minister of Ravan, A weapon of super power. रावणका एक मंत्री, एक विध्यास्त्र”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमदंड–Yamdand. Name of a minister of Ravan, A weapon of super power. रावणका एक मंत्री, एक विध्यास्त्र”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्नेह : == नियलेहि पुरिओ च्चिय वच्चइ पुरितो जहिच्छियं देसं। एक्कं पि अंगुलमिणं, न जाइ घणनेह—पडिबद्धो।। —पउमचरिउ : ५६९ जंजीरों से बंधा हुआ मनुष्य इच्छानुसार देश में जा सकता है, पर घने स्नेह से जकड़ा हुआ मनुष्य एक अंगुल भी नहीं जा सकता।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध नय – Shuddha Naya. Standpoint related to purity believing soul as a supreme one. जो नय आत्मद्रव्य को निरुपाधि स्वभाववाला (ब्रह्मरूप) ग्रहण करता है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूढ़शिष्य–Muudhshishya. An ignorance disciple. अज्ञानी, अविवेकी शिष्य जिसे उपदेश देना व्यर्थ होता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वायुकायिक – Vaayukaayika.: Air-bodies beings (one sensed). स्थावर जीवों का एक भेद , वायु ही जिसका शरीर है उसे वायुकायिक जीव कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुनर्विवाह – Punarvivaha. Remarriage. एक बार विवाह करने के बाद पुनः दूसरा विवाह करना.प्राचीन भारतीय संस्कृति के अनुसार स्त्रियों का पुनर्विवाह वर्जित है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == दया : == दयामूलो भवेद्धर्मो दया प्राण्यनुकम्पनम्। दयाया: परिरक्षार्थं गुणा: शेषा: प्रर्कीितता:।। —आदिपुराण : ५-२७ धर्म का मूल दया है। प्राणी पर अनुकम्पा करना दया है। दया की रक्षा के लिए ही सत्य, क्षमा शेष गुण बताए गए हैं। मा हससु परं दुहियं कुणसु दयं णिच्चमेव दीणम्मि। —कुवलयमाला :…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेघ–Megh. Name of the 20th Patal (layer) of Saudharma heaven, Clouds, Name of kings Yadu and Rakshas dynasties. सौधर्म स्वर्ग का20वापटल, बादल; जो संभवनाथ भगवान्, विमलनाथ भगवान् व अभिनंदननाथ के वैराग्य का कारण है, यदु(यादव) वंश एवं रक्षासवंश के राजाओ का नाम”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गलराशि – Pudgalarasi. An infinitely infinite quantity. द्रव्य गणना की अपेक्षा एक सहनानी; १६ख.(सम्पूर्ण जीव राशि का अनंतगुणा) “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्र शल्य–Mishra Shalya. A type of internal sting. द्रव्य शल्य के तीन भेद मै से एक भेद; सचित्त एवं अचित्त दोनों प्रकार के द्रव्यों में ममत्व भाव”