श्रुतभावना!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतभावना – Shrutabhaavanaa. A kind of auspicious reflection. 5 उत्तम भावना में एक भावना; श्रुतभावना करना अर्थात् तद्विषयक ज्ञान में बारम्बार प्रवृत्ति करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतभावना – Shrutabhaavanaa. A kind of auspicious reflection. 5 उत्तम भावना में एक भावना; श्रुतभावना करना अर्थात् तद्विषयक ज्ञान में बारम्बार प्रवृत्ति करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध-अहिंसा अणुव्रत का एक अतिचार (जानवरों इत्यादि को बंधन में रखना), आत्मा औश्र कर्मो का एक क्षेत्रा वगाह संबंध होना। Bandha- Bondage, tying up, union, bond (reg. karmic theory)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युग्म – जुडवा सम इसके कृतयुग्म और बादरयुग्म दो भेद है कृतयुग्म जो राषि चार से अवहत होती है। बादरयुग्म जिस राषि को चार से अवहन करने पर दो षेश बचता है। Yugma-Pair, Even number
आनत(इन्द्र) A type of celestial deities. तेरहवें स्वर्ग के इन्द्र।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रतिशेणा – पùप्रभु भगवान के समवषरण की गणिनी आर्यिका का नाम Ratisena-Name of the chief Aryika (Ganini) in the Samavasharan of lord Padmaprabhu
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीवत्स – Shreevatsa. A particular type of mark on the chest of meritorious persons, Name of a propounder of Vaishesik literature. तीर्थंकर आदि पुण्यात्माओं का एक शारीरिक लक्षण जो वक्षःस्थल पर होता है ” पार्श्वनाथ चरित्र के अनुसार उनकें नवमें भव पूर्व में पोदनपुर के राजा अरविंद की मुनिअवस्था में उनके वक्षस्थल का श्रीवत्सम…
साधु-जो अट्ठाईस मूलगुणों का पालन करते हैं, सदा रत्नत्रय के साधन हेतु ध्यान और अध्ययन में लगे रहते हैं, वे साधु परमेष्ठी कहलाते हैं। आचार्य, उपाध्याय और साधु ये तीनों ही दिगम्बर वेषधारी मुनि होते हैं। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लतावक्र – कायोत्सर्ग का एक अतिचार लता की भांति इधर उधर हिलना। Laatvakra-An infraction of meditative relaxation (Shaking of the body)
इक्ष्वाकुवंश A dynasty originated from Lord Adinath. भगवान आदिनाथ से यह वंश प्रारम्भ हुआ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रज्जू – लोक को मापने का एक प्रमाण विषेश जगत्श्रेणी का सातवां भाग रज्जू कहलाता है। समस्त लोक की उचाई 14 रज्जू है। Rajju-A measurement unit of area