धम्मरसायण!
धम्मरसायण A book written by a saint, Padmanandiji. मुनि पद्मनन्दि (ई.977) कृत का ग्रंथ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धम्मरसायण A book written by a saint, Padmanandiji. मुनि पद्मनन्दि (ई.977) कृत का ग्रंथ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्या – Vidya. Knowledge, the power of exploring realities of some matter. शिक्षा या यथावस्थित वस्तु के स्वरूप का अवलोकन करने की शक्ति “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मख – Makha. A Sacrificial activity. याग, यज्ञ, पूजा आदि करना , पूजा विधि का पर्यायवाची शब्द “
धनधान्य प्रमाणातिक्रम Exceeding the set limits of grains, cattle and wealth (an infraction). परिगग्रह परिमाणव्रत का एक अतिचार, धन, गाय, भैस एवं धान्य पदार्थ संग्रह के लिए की हुई मर्यादा का उल्लंघन करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्त नय – Sapta Naya. Seven kinds of standpoints. नैगम, संग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शब्द, समभिरुढ़ व एवंभूत। इन सात नयांे मे प्रारंभिक तीन द्रव्यार्थिक नय तथा अंतिम चार पर्यायार्थिक नय कहलाते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धाशुद्धोपयोग – Shuddhashuddhopayoga. Passionless and passionful conduct. शुद्ध व अशुद्ध उपयोग का मिश्ररूप “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सन्मति – Sanmati. The other name of Lord Mahavira, Name of the 2nd Kulkar (ethical Founder). भगवान महावीर का अपरनाम, यह नाम पालने मे झूलते बालक वद्र्वमान को देखकर संजय और विजय नामक चारण ऋद्विधारियो ने अपना संदेह दूर होने पर रखा था। प्रतिश्रुति कुलकर का पुत्र दूसरा कुलकर। इन्होने प्रजा को ज्योतिष विघा…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवभिघ – Bhavabhidya. One destroyer of worldy transmigration, An epi- thet for the devotional prayer of Lord Arihant. संसार का भेदन करने वाली जिनभक्ति का विशेषण “
गुणारोपण Imparting attributes – the ceremony of consec- ration of an idol. प्रतिष्ठा विधान की विधि का एक भेद ; प्रतिमा में गुणों का आरोपण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]