समरंभ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समरंभ-प्रमादी जीवों का प्राणों की हिंसा आदि कार्य में प्रयत्नशील होना समरंभ है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समरंभ-प्रमादी जीवों का प्राणों की हिंसा आदि कार्य में प्रयत्नशील होना समरंभ है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदूर्यमणि –Vaiduryamani The sapphire-a coloured gem, Body colour of Lord Munisuvratnath&Neminath was like sapphire. नीलम, नील वर्ण वाली मणि – तीर्थकर मुनिसुव्रतनाथ एवं तीर्थकर नेमिनाथ का वर्ण वैदूर्यमणि सट्दश था ” सुमेरु पर्वत की चूलिका वैदूर्यमणियी हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंडितपंडितमरण – Panditapanditamarana. Auspicious & holy liberation of omniscient or salvation of Lord Arihant. क्षीणकसाय केवली भगवान के निर्वाण को पंडितपंडित मरण कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदर्भ –Vaidarbha A country of Bharat KshetraAryaKhand (region), Name of the prime chief disciple of Lord Chandraprabh&Lord Pushpadantnath. भरतक्षेत्र आर्यखंड का एक देश, तीर्थकर पुष्पद्न्तनाथ के प्रथम गणधर का नाम (अपरनाम – विदर्भ) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाद – Vaad. Debate, Competitive discussion. हार-जीत के अभिप्राय से की गई किसी विषय सम्बन्धी चर्चा “
एकादिूत्रिलघुक्रिया A method of poetics. छंद शास्त्र के 6 प्रत्ययों में एक प्रकरण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपरीताभिनिवेश – Viparitabhinivesha. Wrong faith due to wrong conception. मिथ्यात्व के उदय से उत्पन्न विपरीत ज्ञान या श्रध्दान “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनि–Muni. The Jain saint–one having Jaineshvari Diksha (Jain–initiation). सामान्य रूप से निर्ग्रन्थ साधुओ को भी मुनि कहा जाता है” चारित्रसार ग्रंथ में ऋषि, मुनि, यति आदि भेदो द्वारा मनःपर्ययज्ञानी व केवलज्ञानी को भी मुनि कहा है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्रद्धि ह्रास – Vrddhi – Hraasa Universal changes pertaining to the growth & destruction. भरत और ऐरावत क्षोत्तों में षटगुण हानि वृद्धि– हास रूप परिवर्तन जिसे उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल के नाम से जाना जाता है “