मोहन!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोहन–Mohan. A king of Rakshas dynasty, A power attracting others, Charm. राक्षस वंशी एक विघाधर राजा एक विद्याशास्त्र–जो व्यक्ति को मुग्ध कर्ता है, आकर्षण”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोहन–Mohan. A king of Rakshas dynasty, A power attracting others, Charm. राक्षस वंशी एक विघाधर राजा एक विद्याशास्त्र–जो व्यक्ति को मुग्ध कर्ता है, आकर्षण”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ष्याभक्ष्य – Bhaksyabhaksya. Different types of edible (vegitable) and non- edible (non-vegitable) items. दाल, दूध, दही, फल आदि भक्ष्य अर्थात् खाने योग्य एंव मघ, मांस, मधु, उदुम्बर फल आदि अभक्ष्य अर्थात् ‘नहीं खाने योग्य’ पदार्थ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योनिभूत बीज – जिस बीज में जलादि का निमित्त पाकर जीव आकार पैदा हो सके। अथवा जिस जीव में उगने की षक्ति अर्थात सहित होने की षक्ति हो। Yonibhuta Bija-Seed germination
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन गोचरातीत – Vachan Gocharaatita.: That which can not be expressed in words. जिसका वचन के द्वारा कथन न किया जा सके ” जैसे – अरिहंत भगवान के अनंत गुणों का वचनों के द्वारा वर्णन करना अशक्य हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्परिग्रह – Nishparigraha. Deprived of possession or attachement. संपूर्ण परिग्रह से रहित होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्ष्मीकूट – षिखरी कुलाचल का छठा कूट। Laksmikuta-The 6th summit of Shikhari Kulachal (mountain)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वकुश –Vakush: Jain saints with attachments . चितकबरा ;जैसा सफेद पर काले धब्बे होते हैं वैसे ही मुनिगण जिनके निर्मल आचार (चारित्र ) में शरीर आदि का मोह धब्बे की तरह होता है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संशय : == जे किर किसीवलाई फलसंसईणो किसिं बिलंबंति। अविकलकारणभावे वि सस्सभागी न ते हुंति।। एवमणुट्ठाणमिणं फलसंसयगब्भिणं पकुव्वंता। दुक्करयं पि हु तप्फला विवज्जिया ते विसीयंति।। —कहारयणकोष : ६-७ जो लोग किसान हैं, वे फल में संशय रखते हुए यदि कृषि कर्म में विलम्ब करते हैं तो वे अविकल…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मौर्य–मौण्डेय–Maurye–Maundey. The 5th& 6th chief disciples of Lord Mahavira. तीर्थंकर महावीर के 5वे एवं छठे गणधर का नाम”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वंगा –Vangaa.: Name of a river of middle Arya Khand(region). मध्य आर्यखंड की एक नदी “