पंच इंद्रिय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच इंद्रिय – Panch Indriya. Five sense organs (body, toung, nose, eyes & ears). स्पर्शन, रसना, घ्राण, चक्षु व श्रोत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच इंद्रिय – Panch Indriya. Five sense organs (body, toung, nose, eyes & ears). स्पर्शन, रसना, घ्राण, चक्षु व श्रोत “
द्रौपदी Wife of Arjun (the daughter of king Drupad). अर्जुन की पतिव्रता स्त्री, राजा द्रुपद की पुत्री । वैदिक महाभारत में द्रौपदी को पाँचों पाण्डवों की पत्नी स्वीकार किया है परन्तु जैन महाभारत (हरिवंशपुराण) में द्रौपदी को मात्र अर्जुन की पत्नी महान शीलवती नारी कहा है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशुध्दमती (आर्यिका) – Vishuddhamati (Aryika). 1. Name of an Aryika, the disciple of Acharya shri Shivsagar Maharaj oa the tradition of Charitra Shri Shantisagar ji Maharaj. 2. Name of a Ganini Aryika, the disciple of Acharya Nirmalsagar (chhani). 1. चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परम्परा के द्वितीय पट्टाचार्य श्री…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालाचार्य – Balacarya. A designation of aJaina saint (to whom the re- sponsibility of saint group is entrusted). संघाघिपती आचार्य ने जिस शिष्य को अपना पद सोंपा हो और आचार्य के समान जिसका गुणसमुदायहो, वे संघाघिपती आचार्य की समाघि होने से पूर्व तक बालाचार्य कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्र – Sutra. Origin, formulae, a source (of information), a precept, A type of code regulating conduct & behaviour, A type of scriptural knowledge. जो अल्प अक्षरों से संयुक्त है, सन्देह से रहित है, परमार्थ सहित है एवं जो ग्रन्थ, तन्तु और व्यवस्था इन तीन अर्थो को भेले प्रकार से सूचित करता है उस…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पीठ – Pitha. Back of the body, Throne, a seat, Name of the 10th Rudra. हिन्दी भाषा में शरीर के पृष्ट भाग व संस्कृत भाषा में आसन, सिंहासन को पीठ कहते हैं. दसवें रूद्र का नाम “
द्रव्य शल्य Physical sting, physical thorn (related to Karmas). मिथ्यादर्शन, माया, निदान ऐसे तीन शल्यों की जिन से उत्पत्ति होती है ऐसे कारणभूत कर्म को द्रव्यशल्य कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म भाषा – Sukshma Bhaashaa. Internal speech (inner voice). शब्दाद्वैतवादी द्वारा मानी गई 4 प्रकार की वाणी में एक भेद । क्षयोपशम से प्रगटी आत्मा की अक्षर को ग्रहण करने की तथा कहने की शक्ति रूप लब्धि । जैन मतानुसार इसे लब्धि रूप भाव वचन स्वीकारा गया है ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिपासा परीषह – Pipasa Parisaha. Affliction of thirst. २२ परीषहों में एक परीषह; साधुओ का खेद रहित होकर प्यास की बाधा को सहना “