फलरस!
फलरस Fruit juice, Fruitional power of Karmas. अंगूर, आम, आदि के रस । कर्मो की फल देने की शक्ति । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
फलरस Fruit juice, Fruitional power of Karmas. अंगूर, आम, आदि के रस । कर्मो की फल देने की शक्ति । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ऊर्ध्वग्रैवेयक An upper most spatial region. 16 स्वर्ग से ऊपर नौ ग्रैवेयक में सुमनस सौमनस प्रीतिंकर नाम के विमान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तैजस समुद्घात Electric overflow, Phosphorescent extrication. जीवों के अनुग्रह और विनाश में समर्थ तैजस शरीर की रचना के लिए तैजस समुदघात होता है। यह शुभ तैजस और अशुभ तैजस दो प्रकार का है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ऊर्ध्वचय Loss in basic decreasing series. ऊर्ध्वगच्छ में अर्थत् मूल गुणहानि में चय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तेररह Thirteen (13 types of faults and 13 types of conducts in Jainalogy). त्रयोदश पांच पाप, चार कषाय , जुगुप्सा , भय रति, अरति ये 13 दोष है, एंव पांच महावृत , पांच समिति और तीन गुप्ति इस प्रकार चारित्र के 13 भेद यप। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हृी – Hriim. One syllabic Mantra (a mystic words), the existence of all twenty four Tirthankars (Jaina Lords) is considered in it. The meditation over it provides the spiritual energy & physical strength. एक अक्षर वाला बीजाक्षर मंत्र। इस मंत्र मे चैबीसो तीर्थकर का अस्तित्व माना गया है। इस मंत्र के ध्यान से शारीरिक…
उर्मिमालिनी A Vibhanga river situated in western Videh (a region). अपर विदेह स्थित एक विभंगा नदी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तृणसंस्तर A type of substratum made of dry & harmless grass (related to Jain saints). 4 प्रकार के संस्तरों में एक भेद गांठ रहित तृण से बना हुआ छिद्र रहित संस्तर। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हेतविुचय – Hetuvicaya. Right contemplation or acceptance of religious path. धर्मध्यान के 10 भेदों मे अंतिम भेद। तर्क का अनुसरण करना और स्याद्वाद्व का आश्रय लेकर समीचीन मार्ग को ग्रहण करना अथवा उसका चिंतन करना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमानंदविलास:A book written by Pandit Devida.पंडित देवीदास (ई0 1755-1767) कृत एक ग्रंथ ।