स्वर्णमध्य!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णमध्य – Svarnamadhya. Another name of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत का अपरनाम।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णमध्य – Svarnamadhya. Another name of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत का अपरनाम।
तप प्रायश्चित्त Austerity for atonement. गुरुजन द्वारा शिष्य के दोष को दूर करने के लिए दिया गया तप का आदेश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सन्यास मरण – Sanyaasa Marana. The holy death of an ascetic. मुनि व्रत धारण कर पंडित मरण करना
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुप विपर्यास – Svaruupa Viparyaasa. A contary viewpoint regarding the form of a matter. मिथ्यात्व। जिस पदार्थ का जो लक्षण है उससे विपरीत उसका स्वरुप समझना।
तपकल्याणक The 3rd auspicious event of Tirthankars’ (Jaina Lord) lives (related to austerity). कल्याणक के पंच कल्याणकों में तृतरीय दीक्षा कल्याणक । इस कल्याण्वशसेष रूप से लौकांतिक देव आकर भगवान के वैराग्यभाव की प्रशंसा करतजे । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संतोष भावना – Santosha Bhaavanaa. Attitude of equanimity or satisfaction. मान अपमान में समता रखना, अशन पान आदि के यथायोग्य लाभ में समता रखना संतोष भावना है “
तद्विलक्षण Knowledge acquired by studying the scriptures (reg. extraordinariness). प्रत्यभिज्ञान का एक भेद, यह उससे विलक्षण है इस प्रकार का ज्ञान होना । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्षमा : == यदि किन्चित् प्रमादेन, न सुष्ठु यस्माभि: सह र्विततं मया पूर्वम्। तद् युष्मान् क्षमयाम्यहं, नि:शल्यो निष्कषायश्च।। —समणसुत्त : ८७ अल्पतम प्रमादवश भी यदि मैंने आपके प्रति उचित व्यवहार नहीं किया हो तो मैं नि:शल्य और कषायरहित होकर आपसे क्षमा—याचना करता हूँ। कोहेण जो ण तप्पदि, सुर–णरतिरिएहि…
ऐन्द्रिय सुख Sensual pleasure. इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त क्षणिक सुख।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ततव समास Name of a treatise written by Maharshi Kapil. सांक्ष्य मत के मूल प्रणेता महर्षि कपलि की एक कृति का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]