धर्म अवर्णवाद!
धर्म अवर्णवाद Wrong or ill speaking about right religion. जिनेंद्र कथित अहिंसा धर्म में झूठे दोष लगाना, धर्म की निंदा करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धर्म अवर्णवाद Wrong or ill speaking about right religion. जिनेंद्र कथित अहिंसा धर्म में झूठे दोष लगाना, धर्म की निंदा करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धम्मरसायण A book written by a saint, Padmanandiji. मुनि पद्मनन्दि (ई.977) कृत का ग्रंथ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बद्ध्यमान आयु- आगामी जिस आयु का बन्ण किया हो वह बद्ध्यमान आयु कहलाती है। Baddhyaman Ayu- Age that has been bound for the next birth
धनधान्य प्रमाणातिक्रम Exceeding the set limits of grains, cattle and wealth (an infraction). परिगग्रह परिमाणव्रत का एक अतिचार, धन, गाय, भैस एवं धान्य पदार्थ संग्रह के लिए की हुई मर्यादा का उल्लंघन करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संख्यात – Sankhyaata. Finite counting. दो को आदि लेकर गणना (गिनने योग्य संख्या) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रसाद – मन में निर्मल भाव लेन वाली वास्तु अनुग्रह कृपा पवित्र द्रव्य Prasada- Propitiatory offering a gift, boon, blessing, sacred materials
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवभिघ – Bhavabhidya. One destroyer of worldy transmigration, An epi- thet for the devotional prayer of Lord Arihant. संसार का भेदन करने वाली जिनभक्ति का विशेषण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुल- अधेलोक की प्रथम रत्नप्रभा पृथ्वी के प्रथम ‘खरभाग’ की 14वीं पृथ्वी (अपरनाम-बकुल) Bahula- Name of an earth
द्वीपसागरप्रज्ञप्ति A type of scriptural knowledge (shrutgyan). अंग श्रुतज्ञान का एक भेद, दृष्टिवाद (12 वें अंग) का एक भेद; जिसमें असंख्यात द्वीप व सागरों का 52 लाख 36 पदों में वर्णन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]