प्रतिषेध!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिषेध – निशेध। pratisedha – repudiation, negation
त्रिखंड A particular triangular sequence of the fruition of Karmas. तीन म्लेच्छखण्डों को त्रिखण्ड कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य धर्मध्यान – Mukhya Dharmdhyan. A type of righteous meditation; mental, meta–physical involvement. धर्मध्यान के दो भेदो (मुख्यऔर उपचार) में एक भेद; आध्यात्मिकता की और मन को एकाग्र करना” इसे निश्चय धयन भी कहते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेश निर्जरा- कर्म परमाणुओं का आत्मा से अलग होना। pradesa nirjara – seperation of karmic molecules from soul
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाभांत – Nabhamta A city in the south of Vijayardh mountain विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विवेक : == नो छादयेन्नापि च लूषयेद् , मानं न सेवेत प्रकाशनं च। न चापि प्राज्ञ: परिहासं कुर्यात् , न चाप्याशीर्वादं व्यागृणीयात्।। —समणसुत्त : २३९ (अमूढ़दृष्टि या विवेकी) किसी के प्रश्न का उत्तर देते समय न तो शास्त्र के अर्थ को छिपाए और न अपसिद्धान्त के द्वारा शास्त्र…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदीप्त- सुलगाया हुआ, प्रज्वलित, प्रकाषमान। pradipta – shining, bright, glowing,
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नागास्त्र – Nagastra A type of armament in the form of snake. नागरुप एक अस्त्र, इसे नष्ट करने के लिए गरुड़ अस्त्र का प्रयोग किया जाता है ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजगार बंध – Bhujagara Bandha. Binding of Karma increasingly. जहां पहले थोड़ी कर्म प्रक्रति का बंध होता था फिर अधिक – अधिक बंध हो वह भुजगार बंध है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रथमोपशम सम्यत्त्व – अनादि मिथ्यादृश्टि जीव के मिथ्यात्व से छूटकर जो सर्वप्रथम उपषम सम्यŸाव होता है वह प्रथमोपषम सम्यत्त्व है। prathamopasama samyaktva – first subsidential right beleif.