तिर्यक् द्विक!
तिर्यक् द्विक A dyad related to subhuman beings (Tiryanch). तिर्यच गति व आनुपूर्वी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तिर्यक् द्विक A dyad related to subhuman beings (Tiryanch). तिर्यच गति व आनुपूर्वी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धमति – Shuddhamati. Name of the 22nd Tirthankar (Jaina-Lord) of past era. भूतकालीन 22 तीर्थंकर “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंगल:State of auspiciousness, name of a planet (Mars), Name of a deity of Saumnas Gajdant mountain and its summits. जो पाप रूपी मल को गलाता है अथवा जो सुख या पुण्य को लाने वाला है वह मंगल है (पंचनमस्काररूप णमोकार मंत्र समस्त मंगलो में प्रथम मंगल कहा जाता है), एक ग्रह का नाम,…
तिर्यांच The beings other than human, celestial & infernal beings. मनुष्य , देव और नारकी जीवों को छोड़कर शेष एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय तक के जीव तिर्यंच कहलाते हैं। मन वचन काय की कुटिलता को प्राप्त, निकृष्ट अज्ञानी और जिनके अत्यधिक पाप की बहुलता पायी जाये, उसको तिर्यंच कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विग्रह – Vigraha.: Quarrel,Separation. कलह, विच्छेद ” विग्रह – Vigraha.: Getting the body through transmigration. देह; नामकर्म के उदय से शरीरों के योग्य पुद्गलों का ग्रहण विग्रह कहलाता है “
तारणपंथी Non-idolator sect of Digambara Jain tradition. दिगम्बर जैनों में मूर्ति पूजा को न मानने वाला एक नया पंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विकाल –Vikaala.: Name of the 10th planet among 88. 88 ग्रहों में 10 वां ग्रह “
तात्पर्यवृत्ति Name of commetary books; written by Acharya Abhaynandi & Acharya Jaisen separately. आचार्य अभयनन्दि (ई. 930-950) द्वारा रचित तत्वार्थ सूत्र की टीका का नाम , आर्चार्य जयसेन (ई.श. 11-12) वृत्त समयसार , प्रवचनसार , व पंचास्तिकाय की टीकाएँ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विन्ध्याचल-Vindhyaachala.: Name of a mountain of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरतक्षेत्र आर्यखंड का एक पर्वत “
तप्त ऋद्धि Heated, hot. जिस ऋद्धि से खाया हुआ अन्न धातुओं सहित क्षीण हो जाता है अर्थात् मल- मूत्रादि रूप परिणमन नहीं होता ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]