आराधना सार!
आराधना सार A book written by ‘Acharya Devsen’. आचार्य देवसेन (वि.990-1012) द्वारा रचित एक चतुर्विध आराधना विषयक ग्रन्थ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आराधना सार A book written by ‘Acharya Devsen’. आचार्य देवसेन (वि.990-1012) द्वारा रचित एक चतुर्विध आराधना विषयक ग्रन्थ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकार्थ समवायी Co – inherent in the same substratum. सहसंयोगी पदार्थ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यक्षर ज्ञान – पर्याय ज्ञान या सबसे जघन्य श्रुतज्ञान।इसे निरावरण ज्ञान भी कहते है यह सूक्ष्म निगोदिया लब्ध्यप्र्याप्तक जीव के उत्पन्न होने के पहले समय में होता है। Labdhyaksara Jnana-The lowest level of knowledge
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपाक विचय – Vipaka Vichaya. Contemplation over worldly peculiarities due to the fruition of karmas. धर्मध्यान के ४ भेदों में चौथा भेद; इसमें कर्मों के विपाक से उत्पन्न सांसारिक विचित्रता का चिंतन किया जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिसम्पन्न ऋशि – सम्यग्दर्षन प्राप्ति का एक निमित लब्धिसम्पन्न ऋशियो का दर्षन। Labdhisampanna Rsi-Super saints, visiting of whom is a cause of right faith
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सकलादेश – Sakalaadesha. Other name of Sayaggyan (right knowledge). प्रमाण अर्थात् सम्यग्ज्ञान को सकलादेश कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीर –Vira Warrior, Brave, One of the 5 names of Lord Mahavira पराक्रमी, वीरता प्रकट करना, भगवन महावीर के ५ नामों में एक नाम “
दीर्घतपस्वी One deeply involved in austerity. ऊंची (बड़ी) तपस्या करने वाला।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव त्रिभंगी – Bhava Tribhamgi. Name of a book. औपशमिकादि भाव विषयक एक ग्रंथ “