पारलौकिक भय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारलौकिक भय – Parlaukika Bhaya. Fear regarding the next birth (fear of next world). ७ भयों में एक भय; मेरा दुर्गति में जन्म न हो इत्यादी प्रकार से ह्रदय का आकुलित होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारलौकिक भय – Parlaukika Bhaya. Fear regarding the next birth (fear of next world). ७ भयों में एक भय; मेरा दुर्गति में जन्म न हो इत्यादी प्रकार से ह्रदय का आकुलित होना “
दातार दोष Fault of donator, jealousy, angerness, proud etc. ईष्र्या , कपट, खिन्न भाव, क्रोध, अभिमान आदि दातार के दोष हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेश्या – Leshya.: Karmic stain , Aura , colouration. कषाय से अनुरंजित जीव की मन वचन काय की या जो आत्मा को शुभाशुभ कर्मों से लिप्त करे ” कृष्ण , नील , कपोत , पीत ,पद्य , शुक्ल इसके ये 6 भेद है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाप आस्त्रव – Papa Asrava. Influx of sinful Karmas. पाप कर्मो के आने के कारणभाव- कलुषता, विषयों के प्रति लोलुपता, पर को परिताप करना आदि”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशाखदत्त – Vishakhadatta. The first Achary possessing knowledge of 11 Angas & 10 purvas (parts of shrutgyan-scriptural knowledge). ११ अंग १० पूर्व के ज्ञाता ११ मुनियों में प्रथम आचार्य ” अपरनाम विशाखाचार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्रदेाष :A fault to have jealousy with worthy donees.पात्र के प्रति ईष्र्या आदि का होना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाणिपात्र :Hand bowl (hallowed open hands joined together) used in food taking by Digambar Jana Saints.दोनो हाथ को मिलाकर बनी अंजुलि को पाणिपात्र कहते है। दिगम्बर जैनसाधु पाणिपात्र मे आहार ग्रहण करते है।
आतपत्र A parasol – one of the 14 jewles of a Chakravarti (emperor). चक्रवर्ती के 14 रत्नों में एक रत्न-छत्र।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघिमा ऋद्धि – विक्रिया ऋशि का एक भेद, जिस ऋशि के प्रभाव से साधु अपने षरीर को वायु से भी हल्का बनाने मे समर्थ थे। Laghima Rdhhi-A type of super natural power pertaining to turning body lighter than air