गौरीविद्या!
गौरीविद्या A super knowledge, initiator of Gaurik Vidyadhar dynasty. एक विद्या; जिससे गौरिक विद्याधर वंश की उत्पत्ति हुई ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गौरीविद्या A super knowledge, initiator of Gaurik Vidyadhar dynasty. एक विद्या; जिससे गौरिक विद्याधर वंश की उत्पत्ति हुई ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगंकरा:A female deity of Gajdant summit. गजदन्त कूट की एक देवी का नाम “
गद्यचिंतामणि A book written by Acharya Vadeebh singh. आचार्य वादीभसिंह ओइय देव (ई. ७७०-८६०) द्वारा रचित एक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध निश्चयनय – Shuddha Nishchayanaya. A viewpoint believing the pure soul . शुद्ध आत्मा द्रव्य को ग्रहण करने वाला नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतराग सम्यग्दृष्टि –VitaragaSamyagdrsti. One having right spiritual knowledge. निश्चय सम्यग्दृष्टि, जो वीतराग सम्यग्दर्शन से सहित होते है “
गरूड़व्यूह A kind of strategy (reg. army). एक विशिष्ट सैन्य-व्यूह, ऐसी रचना चक्रव्यूह को भंग करने के लिए की जाती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्ववत् अनुमान – Poorvavat Anumaana. Predetermination of any result according to the previous experience, the senseful inference. स्वार्थानुमान के तीन भेदों में से एक भेद; जिसने अग्नि से निकलते धूम को पहले देखा है , उस व्यक्ति के द्वारा पुनः धूम को देखकर यहाँ अग्नि है ऐसा अनुमान कर लेना पूर्ववत् अनुमान है “
गंगादास Disciple of Dharmachandra Bhattarak. धर्मचंद्र भट्टारक के शिष्य ई.सन् १६९०-१६९३ सम्मेद विलास ,सम्मेदशिखर पूजा, श्रुतस्कंध पूजा आदि के कर्ता । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्व – Poorva. A particular time unit, 14 particular parts of scriptual knowledge (Shrutgyan). (1) काल का एक प्रमाण विशेष; 84 लाख पूर्वाङ् प्रमाण काल , (2) श्रुतज्ञान का एक भेद – जिसमें उत्पाद, व्यय, ध्रोव्य आदि की प्ररूपणा की जाती है उसे पूर्व कहते हैं” इसके 14 भेद “
खरभाग A part of the Ratnaprabha earth of hell. नरक की प्रथम पृथ्वी रत्नप्रभा के तीन भागों में प्रथम भाग .यह १६ हजार योजन मोटा एवं भवनवासी देवों का निवासस्थान है । [[श्रेणी:शब्दकोष]]