प्रवाद!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाद- जिसके द्वारा इश्ट अर्थे को उतमता से प्रतिपादित किया जाय, उसे प्रवा कहते है। Pravada- Discourse, right exposition
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाद- जिसके द्वारा इश्ट अर्थे को उतमता से प्रतिपादित किया जाय, उसे प्रवा कहते है। Pravada- Discourse, right exposition
चल संख्या Variable number, a mathematical term. एक गणितीय पद, x,y,z तरह की संख्या ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यक्ष विनय- pratyaksa vinaya Paying reverence complelty to honourables मन, वचन व काय से गुरु आदि का विनय करना।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == जीव : == प्राणैश्चतुर्भिर्जीवति, जीविष्यति य खलु: जीवित: पूर्वम्। स जीव:, प्राणा:, पुनर्बलमिन्द्रियमायुरुच्छ्वास:।। —समणसुत्त : ६४५ जो चार प्राणों से वर्तमान में जीता है, भविष्य में जीयेगा और अतीत में जिया है, वह जीव द्रव्य है। प्राण चार हैं—बल, इन्द्रिय, आयु और उच्छ्वास। अणुगुरुदेहप्रमाण: उपसंहारप्रसप्र्पत: चेतयिता। असमवहत: व्यवहारात्,…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य तप – Bahya Tapa. Austerity related to external things or activities. तप का एक भेद;अनशन , अवमौदर्य, वृत्तिपरिसंख्यान , रसपरि –त्याग, विवित्त्कशय्यासन और कायक्लेश छह प्रकार का है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्राह्मण – Brahmana. A Hindu- caste, known by virtues and good activities. जैन धर्म के अनुसार भरत चक्रवर्ती द्वारा स्थापित वर्ण ” ये ब्रह्मसूत्र (यज्ञोपवीत) को धारण करते थे तथा अहिंसा आदि सदाचार को पालते थे “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यभिचार – Vyabhicara. Immoral character, adultery, Transgression, Violation. कुशील पाप से संबंधित चरित्रहीनता, अतिक्रमण, असंगति ,
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वसमय वक्तव्यता – Svasamaya Vaktavyataa. Pertaining to spiritual meanings. वक्तव्यता के तीन भेदो मे एक भेद। जिस शास्त्र मे स्वसमय का ही वर्णन किया जाता है उसे स्वसमय वक्तव्य कहते है और उसके भाव को अर्थात् उसमे रहने वाली विषेषता को स्वसमय वक्तव्यता कहते है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सद्गति : == समणं भट्ठचरित्तं ण हु सक्को सुग्गइं णेदुं। —मूलाचार, समयसराधिकार : १४ चारित्र से भ्रष्ट होने वाला श्रमण सद्गति प्राप्त करने में समर्थ नहीं।